RBI Digital Payment Rules 2026: देश में बढ़ते डिजिटल अपराधों पर लगाम लगाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक क्रांतिकारी सुरक्षा ढांचा तैयार किया है। ‘5-पॉइंट सेफ्टी प्लान’ के नाम से चर्चित इन नियमों का उद्देश्य आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई को साइबर ठगों से सुरक्षित रखना है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के बाद, आरबीआई अब डिजिटल लेनदेन की रफ्तार से ज्यादा उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
डिजिटल डकैती पर लगाम और कड़े नियमों की आवश्यकता
सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देश ने 28 लाख डिजिटल फ्रॉड के मामले देखे, जिसमें नागरिकों के खातों से कुल 22,931 करोड़ रुपये की सेंधमारी की गई। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 98 प्रतिशत धोखाधड़ी 10,000 रुपये से अधिक की राशि की थी। इसी वित्तीय जोखिम को कम करने के लिए आरबीआई ने डिजिटल भुगतान सुरक्षा (Digital Payment Safety) के नए कड़े मानक प्रस्तावित किए हैं, ताकि भविष्य में होने वाली ‘ऑनलाइन लूट’ को रोका जा सके।
‘किल स्विच’ और 1 घंटे का वेटिंग पीरियड
आरबीआई के मास्टर प्लान में सबसे महत्वपूर्ण ‘किल स्विच’ (Kill Switch) का प्रावधान है। इसके तहत यदि किसी यूजर को संदिग्ध गतिविधि का आभास होता है, तो वह एक सिंगल क्लिक के जरिए अपनी यूपीआई, नेट बैंकिंग और कार्ड सेवाओं को तुरंत ब्लॉक कर पाएगा। इसके अलावा, 10,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर एक घंटे का बफर टाइम (One-hour Waiting Period) रहेगा। इस दौरान पैसा बैंक के पास ‘होल्ड’ पर रहेगा, जिससे फ्रॉड की स्थिति में ग्राहक के पास लेनदेन रद्द करने का पर्याप्त समय होगा।
वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और ‘ट्रस्टेड पर्सन’ का नया कांसेप्ट
अक्सर देखा गया है कि साइबर अपराधी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के जरिए बुजुर्गों को अपना निशाना बनाते हैं। इसे रोकने के लिए 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए ‘ट्रस्टेड पर्सन’ का विकल्प दिया जाएगा। बड़े लेनदेन के दौरान बैंक ग्राहक द्वारा नामांकित किसी भरोसेमंद व्यक्ति से वेरिफिकेशन मांग सकता है। यह अतिरिक्त प्रमाणीकरण (Additional Authentication) वरिष्ठ नागरिकों के खातों को अवैध पहुंच से बचाने में कवच का काम करेगा।
म्यूल अकाउंट्स पर वार और शैडो क्रेडिट का पहरा
धोखाधड़ी के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए ठग अक्सर ‘म्यूल अकाउंट्स’ (फर्जी खाते) का उपयोग करते हैं। आरबीआई अब प्रत्येक खाते के लिए वार्षिक क्रेडिट लिमिट तय करने पर विचार कर रहा है। यदि किसी खाते में अचानक सीमा से अधिक धन आता है, तो उसे ‘शैडो क्रेडिट’ (Shadow Credit) में डाल दिया जाएगा। इसका अर्थ है कि राशि खाते में दिखाई तो देगी, लेकिन उसे तब तक नहीं निकाला जा सकेगा जब तक खाताधारक पैसे के वैध स्रोत का प्रमाण बैंक को न दे दे।
बायोमेट्रिक्स और डिवाइस पहचान
अब केवल ओटीपी (OTP) के भरोसे रहना बीते दिनों की बात होगी। नए नियमों के तहत उच्च-मूल्य वाले लेनदेन के लिए बायोमेट्रिक्स, पिन या सुरक्षा टोकन अनिवार्य किए जा सकते हैं। साथ ही, बैंक का सिस्टम यह ट्रैक करेगा कि ट्रांजैक्शन किसी नए डिवाइस से हो रहा है या यूजर के पुराने भरोसेमंद डिवाइस से। इस मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) के जरिए डिजिटल वॉलेट की सुरक्षा को कई गुना मजबूत किया जाएगा।
आरबीआई ने इन क्रांतिकारी बदलावों पर आम जनता और विशेषज्ञों से 8 मई 2026 तक सुझाव मांगे हैं। हालांकि इन नियमों से इंस्टेंट पेमेंट की सुविधा थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सुरक्षित भारत, डिजिटल भारत’ के लिए यह एक आवश्यक कदम है।










