रांची
जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की छानबीन कर रही सीआईडी ने परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के गिरफ्तार मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी से रिमांड के दौरान लंबी पूछताछ की है।
रिमांड पर पूछताछ के दौरान अभय कुमार तिवारी ने जेपीएससी की परीक्षाओं में अनियमितता, वसूली आदि के बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया है।
उसने अपने बयान में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष सह झारखंड सरकार के पूर्व मुख्य सचिव सेवानिवृत्त एल. खियांग्ते के अलावा सिंडिकेट में जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा व डॉ. जमाल अहमद के अलावा पतंजली कोचिंग के रवि कुमार, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के साठगांठ से पर्दा उठाया है।
उसने बताया है कि इस सिंडिकेट ने 11वीं व 13वीं जेपीएसससी के साक्षात्कार में भी लाभ पहुंचाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये की वसूली की थी।
अभय तिवारी ने आगे यह भी बताया है कि उसने एक आदित्य पांडेय (कोचिंग संचालक) नामक व्यक्ति संपर्क कर अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया।
आदित्य पांडेय ने जेपीएससी की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम ने सिंडिकेट के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों के माध्यम से सात प्रतिभागियों के साक्षात्कार में नंबर बढ़ाए, जिसके लिए प्रति अभ्यर्थी 15-15 लाख रुपये की वसूली की गई थी।
जिन्हें पास कराया, उनमें तीन डीएसपी, एक उप कारापाल भी हैं शामिल
अभय तिवारी ने पूछताछ में बताया है कि सिंडिकेट के माध्यम से जिन्हें साक्षात्कार में नंबर बढ़ाकर पास कराया, उनमें तीन डीएसपी एक उप कारापाल के अलावा अन्य अभ्यर्थी भी हैं शामिल।
इनमें डीएसपी रोबिन कुमार, डीएसपी रोबिन सिन्हा, उप कारापाल राजेश कुमार रजक, डीएसपी मनीष कुमार, गौतम कुमार आदि सफल हुए। डीएसपी रोबिन कुमार, डीएसपी रोबिन सिन्हा व उप कारापाल राजेश कुमार रजक को पास कराने के लिए कोडरमा के एजेंट लालू यादव ने अभय तिवारी से संपर्क किया था।
इसके बाद अभय तिवारी ने जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते, तत्कालीन सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के माध्यम से बोर्ड में मदद की। एक अभ्यर्थी डीएसपी मनीष कुमार का संपर्क डॉ. अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम ने व दूसरे अभ्यर्थी गौतम कुमार का संपर्क पतंजली कोचिंग के संचालक रवि कुमार ने सिंडिकेट से कराया। अभय तिवारी के अनुसार इस सिंडिकेट में दूसरे एजेंट भी सक्रिय थे।
ऐसे तय किया गया था प्रारंभिक परीक्षा से लेकर अंतिम परीक्षा तक पास कराने का दर
अभय तिवारी के अनुसार, परीक्षा पास कराने का दर अलग-अलग तय था। 11वीं व 13वीं जेपीएससी परीक्षा के दौरान प्रारंभिक परीक्षा से लेकर अंतिम परीक्षा तक के लिए अलग-अलग दर तय था।
प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए सामान्य वर्ग के लिए पांच लाख, एससी-एसटी के लिए दो से तीन लाख रुपये तय था। वहीं, अंतिम रूप से पास कराने के लिए यह दर प्रति अभ्यर्थी 60 से 70 लाख रुपये तक था।
साक्षात्कार की राशि डॉ. अजिता भट्टाचार्य का पीए मोरहाबादी का रहने वाला ब्रजराम वसूलता था। जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय के कंप्यूटर आपरेटर धर्मेंद्र के माध्यम से पैसे वसूलते थे।
जेपीएससी सदस्य डॉ. जमाल अहमद के लिए हजारीबाग के बिचौलिए अभ्यर्थियों से वसूली करते थे। इसकी जानकारी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह को रहती थी। जेपीएससी के सभी पदाधिकारी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह को ही साक्षात्कार में अभ्यर्थियों के कोड को डी-कोड करने के लिए कहते थे।
रामवीर सिंह इसका जिक्र अभय तिवारी से करता था। अधिकतर अभ्यर्थी जेपीएससी के सदस्यों के माध्यम से ही दर तय करते थे और फिर साक्षात्कार में पूरा खेल होता था।
दस लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी तय था सीडीपीओ परीक्षा का रेट
अभय तिवारी ने सीआईडी को बताया है कि सीडीपीओ की परीक्षा पास कराने का दर दस लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी तय था। इसमें भी टीडीपीएल ने अभ्यर्थी उपलब्ध कराया है। इसमें सामान्य वर्ग में झारखंड के बाहर के राज्यों के अभ्यर्थी भी चयनित हुए थे।
एक अभ्यर्थी रजक से एल. खियांग्ते के सहयोगी धर्मेंद्र ने 15 लाख लिए, जबकि एक अन्य अभ्यर्थी काजल भारती से डॉ. अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम ने 10 लाख रुपये की वसूली की थी। ब्रजराम भी पतंजली कोचिंग के संचालक रवि कुमार के संपर्क में था।
एक अन्य अभ्यर्थी प्रमोद कुमार पाठक का बिचौलिया आइटीआई का प्रोजेक्ट मैनेजर कृष्णा था। उसने कुमारी सोनी जायसवाल, विभूति कुमार, स्वाति कुमारी अंकित कुमार आदि को परीक्षा पास कराने का सौदा कराया था।
टीडीपीएल के निदेशक रामवीर ने स्वीकारा, क्रमांक के आधार पर टीडीपीएल बनाताथा कोड
टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने सीआईडी की पूछताछ में स्वीकारा है कि 11वीं व 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा व सीडीपीओ के साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के क्रमांक के आधार पर टीडीपीएल एक कोड बनाता था।
उसी कोड पर साक्षात्कार में खेल होता था। कोड के आधार पर ही जेपीएससी बोर्ड के सदस्यों से वैसे अभ्यर्थियों को पास कराने का खेल होता था।










