Ranji Trophy 2026 Final: 11 साल बाद कर्नाटक ने फाइनल में मारी एंट्री, जम्मू-कश्मीर से होगी टक्कर

रणजी ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है। देवदत्त पडिक्कल की कप्तानी में कर्नाटक ने 11 साल का सूखा खत्म कर फाइनल में जगह बनाई है, जहाँ उनका सामना पहली बार फाइनल खेल रही जम्मू-कश्मीर की टीम से होगा। हुबली के हुबली में 24 फरवरी से शुरू होने वाला यह मैच इतिहास रचेगा।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 19, 2026

Ranji Trophy 2026 Final:  भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट ‘रणजी ट्रॉफी’ को अपना पहला फाइनलिस्ट मिल गया है। लखनऊ के मैदान पर खेले गए पहले सेमीफाइनल मुकाबले में कर्नाटक ने उत्तराखंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट कटा लिया है। हालांकि यह मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन पहली पारी में विशाल बढ़त हासिल करने के आधार पर कर्नाटक को विजेता घोषित किया गया। अब 24 फरवरी से होने वाले महामुकाबले में कर्नाटक का सामना जम्मू-कश्मीर से होगा, जिसने पहली बार फाइनल में पहुँचकर इतिहास रचा है।

12 साल का सूखा खत्म: कर्नाटक की खिताबी जंग के लिए वापसी

कर्नाटक क्रिकेट के लिए यह एक ऐतिहासिक पल है। टीम ने आखिरी बार 12 साल पहले रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जगह बनाई थी। इस बार टीम ने पूरे टूर्नामेंट में दबदबा बनाए रखा और सेमीफाइनल में उत्तराखंड की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया। दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर की टीम का फाइनल में पहुँचना भारतीय क्रिकेट की बदलती तस्वीर को बयां करता है। अब प्रशंसकों की नजरें 24 फरवरी पर टिकी हैं, जब दो दिग्गज टीमें आमने-सामने होंगी।

रविचंद्रन स्मरण: कर्नाटक की बल्लेबाजी की नई दीवार

कर्नाटक को फाइनल की दहलीज तक पहुँचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रविचंद्रन स्मरण ने निभाई है। स्मरण इस सीजन में ‘रन मशीन’ साबित हुए हैं। उन्होंने अब तक टूर्नामेंट में सर्वाधिक 950 रन बनाए हैं। उनका बल्लेबाजी औसत 85 का रहा है, जो उनकी निरंतरता को दर्शाता है। इस सीजन में उनके बल्ले से 4 शानदार शतक और 3 अर्धशतक निकले हैं। स्मरण की लंबी पारियों ने ही कर्नाटक को कई मैचों में जीत की स्थिति में खड़ा किया।

देवदत्त पडिक्कल का कप्तानी प्रदर्शन: सेमीफाइनल में जड़ा दोहरा शतक

टीम के कप्तान देवदत्त पडिक्कल ने मोर्चे से टीम का नेतृत्व किया है। पडिक्कल ने इस सीजन में 66.5 की प्रभावशाली औसत से 532 रन बनाए हैं। सेमीफाइनल जैसे बड़े मंच पर उन्होंने अपनी क्लास दिखाते हुए उत्तराखंड के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं और 232 रनों की मैराथन पारी खेली। टूर्नामेंट में अब तक 2 शतक और 1 अर्धशतक लगाकर उन्होंने साबित कर दिया है कि वे बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं।

अनुभवी करुण नायर की वापसी और रनों की बौछार

अनुभवी बल्लेबाज करुण नायर की कर्नाटक टीम में वापसी टीम के लिए वरदान साबित हुई। नायर ने मिडिल ऑर्डर को मजबूती देते हुए 8 मैचों में 63.54 की औसत से 699 रन बनाए हैं। उनके बल्ले से निकले 2 शतक और 3 अर्धशतक इस बात का प्रमाण हैं कि उनमें अभी भी वही पुराना दमखम बाकी है। दबाव की परिस्थितियों में नायर के अनुभव ने कर्नाटक को बिखरने से बचाया।

श्रेयस गोपाल की फिरकी का जादू: चटकाए 46 विकेट

जहाँ बल्लेबाजों ने रनों का अंबार लगाया, वहीं गेंदबाजी में श्रेयस गोपाल ने विरोधी टीमों की नाक में दम कर रखा है। गोपाल ने इस सीजन के 9 मैचों में अपनी जादुई फिरकी के दम पर कुल 46 विकेट झटके हैं। उनकी सटीक लाइन-लेंथ और विकेट निकालने की क्षमता ने कर्नाटक को हर मैच में विपक्षी टीम के 20 विकेट लेने में मदद की। फाइनल में भी कर्नाटक की उम्मीदें गोपाल की उंगलियों के जादू पर टिकी होंगी।

केएल राहुल का ‘इम्पैक्ट’: कम मैचों में भी दिखाया क्लास

भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज केएल राहुल ने भी अपनी घरेलू टीम के लिए बहुमूल्य योगदान दिया। राहुल ने इस सीजन में केवल 3 मैच खेले, लेकिन उनकी मौजूदगी ही विपक्षी टीम के लिए खौफ का सबब बनी। उन्होंने मात्र 6 पारियों में 91.4 की औसत से 457 रन ठोक दिए। 2 शतक और 2 अर्धशतक लगाकर राहुल ने टीम को महत्वपूर्ण अंक दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई और फाइनल की राह आसान की।

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