Ramadan 2026: रमजान का पाक महीना मुसलमानों के लिए इबादत, सब्र और आत्मशुद्धि का समय होता है। इस दौरान रोजेदार पूरे समर्पण के साथ रोजा रखते हैं, पांच वक्त की नमाज अदा करते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और जरूरतमंदों को जकात देकर नेकी कमाते हैं। इस्लाम में रोजा रखना हर बालिग मुसलमान पर फर्ज माना गया है। यह महीना इंसान को आत्मसंयम, अनुशासन और अल्लाह की इबादत के जरिए आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है।
19 फरवरी 2026 से शुरू हुआ रमजान अब अपने छठे दिन में प्रवेश कर रहा है। 24 फरवरी 2026, मंगलवार को रोजेदार छठा रोजा रखेंगे। इस खास दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी बताया गया है।
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रमजान के तीन अशरे
आपको बता दें कि, रमजान के 30 दिनों को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिन्हें अशरा कहा जाता है। पहला अशरा रहमत (अल्लाह की दया), दूसरा बरकत (आशीर्वाद) और तीसरा मगफिरत (माफी) का होता है। हर अशरे में रोजेदार अल्लाह से अलग-अलग नेमतों की दुआ करते हैं। इस पूरे महीने में रोजा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि बुराइयों से दूर रहना, झूठ और बुरे कामों से बचना और अच्छे आचरण को अपनाना भी जरूरी है।
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छठे रोजे का आध्यात्मिक संदेश

रमजान का छठा रोजा ईमानदारी, सब्र और फरमाबर्दारी का पैगाम देता है। कुरान की सूरह शूरा की आयत में सब्र और माफी की अहमियत बताई गई है। जो इंसान धैर्य रखता है और दूसरों को माफ करता है, उसे अल्लाह की खास रहमत मिलती है। इस दिन रोजेदार खुद को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हैं और अपने व्यवहार में सुधार लाने की कोशिश करते हैं। सच्चे दिल और पक्के इरादे के साथ रखा गया रोजा अल्लाह की नजर में बेहद अहम माना जाता है।
सहरी और इफ्तार का सही समय क्यों जरूरी है?
रोजा सही तरीके से पूरा करने के लिए सहरी और इफ्तार के समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
- सहरी फज्र की अजान से पहले की जाती है। यह दिनभर के रोजे के लिए ताकत देती है।
- इफ्तार मगरिब की अजान के साथ किया जाता है, जिससे रोजा खोला जाता है।
समय का पालन करना धार्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए रोजेदार अपने-अपने शहर के सहरी और इफ्तार का सही समय जानकर ही रोजा रखते और खोलते हैं।
दिल्ली, मुंबई समेत अन्य शहरों में रोजे का समय
24 फरवरी 2026 को 6 रमजान होगा। इस दिन रोजेदार दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कानपुर, चेन्नई और देश के अन्य शहरों में स्थानीय समय के अनुसार सहरी और इफ्तार करेंगे। हर शहर में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में फर्क होने के कारण रोजे का समय भी अलग-अलग होता है। रोजेदारों के लिए जरूरी है कि वे अपने शहर की अधिकृत टाइमिंग देखकर ही सहरी और इफ्तार करें, ताकि रोजा सही तरीके से पूरा हो सके।
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रमजान: आत्मसंयम और नेकी का महीना
रमजान का महीना इंसान को बुराइयों से दूर रहकर अच्छे कर्मों की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। यह समय अपने भीतर झांकने, दूसरों की मदद करने और अल्लाह से माफी मांगने का होता है। छठे रोजे के साथ ही यह पाक महीना आगे बढ़ रहा है, और रोजेदार पूरी आस्था और अनुशासन के साथ इस इबादत को निभा रहे हैं।









