Ram Mandir Trust Case: निर्मोही अखाड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, फोरेंसिक ऑडिट की मांग

राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में ट्रस्ट के पुनर्गठन और वित्तीय लेन-देन की फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और इस मामले में आने वाले अगले कानूनी फैसले पर टिकी है।

Ram Mandir Trust Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 18, 2026

Ram Mandir Trust Case: अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर से जुड़े मामले में एक नया मोड़ तब आया जब निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अखाड़े द्वारा दाखिल की गई नई याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2019 में शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसले के लगभग सात वर्षों के उपरांत भी इसका समुचित पालन नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क है कि केंद्र सरकार द्वारा गठित ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ में उन व्यक्तियों को शामिल किया गया है, जिनका राम जन्मभूमि के साथ कोई भी ऐतिहासिक, धार्मिक या कानूनी संबंध नहीं रहा है। अखाड़े ने यह भी गंभीर चिंता जताई है कि ट्रस्ट के कुछ सदस्यों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से न केवल मंदिर की गरिमा प्रभावित हो रही है, बल्कि इससे श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी ठेस पहुंची है।

अखाड़े का दावा: पारंपरिक सेवायत को प्रतिनिधित्व मिले

निर्मोही अखाड़े का स्पष्ट मानना है कि किसी भी धार्मिक स्थल का संचालन उसके पारंपरिक सेवायत (शेबैत) की उपस्थिति और मार्गदर्शन के बिना पूर्ण नहीं हो सकता। अपनी याचिका में अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि ट्रस्ट में उन्हें उनकी पारंपरिक भूमिका और उचित प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए। याचिका में मांग की गई है कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पुनर्गठन किया जाए। इसके साथ ही, ट्रस्टियों की नियुक्ति के लिए पारदर्शी और स्पष्ट नियमों का निर्धारण हो, ताकि भविष्य में प्रशासनिक विवादों से बचा जा सके।

वित्तीय पारदर्शिता और पूजा पद्धति को लेकर महत्वपूर्ण मांगें

अखाड़े ने मंदिर की व्यवस्था को लेकर कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं। उन्होंने आग्रह किया है कि मंदिर में होने वाली दैनिक पूजा, अर्चना, सेवा और भोग की पूरी प्रक्रिया ‘रामानंदी परंपरा’ के अनुरूप संचालित होनी चाहिए। याचिका में श्री रामलला विराजमान की मूल मूर्तियों को पुनः स्थापित करने का भी आग्रह किया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, अखाड़े ने कोर्ट से मांग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट के समस्त वित्तीय लेन-देन की एक स्वतंत्र एजेंसी से फोरेंसिक ऑडिट कराई जाए। साथ ही, 2019 के फैसले के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र समिति के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है।

प्रशासनिक पुनर्गठन और निगरानी बोर्ड की आवश्यकता

अंत में, निर्मोही अखाड़े ने कोर्ट से केंद्र सरकार को ‘ट्रस्ट डीड’ में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश देने का आग्रह किया है। याचिका में सुझाव दिया गया है कि ‘बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़’ का पुनर्गठन करते समय उसमें ‘रामानंदी बैरागी संप्रदाय’ के सदस्यों वाले एक निगरानी बोर्ड को शामिल किया जाए। यह भी मांग की गई है कि ट्रस्टियों का चयन उच्च चरित्र और सत्यनिष्ठा वाले उन लोगों में से किया जाना चाहिए, जिनका श्री राम जन्मभूमि या रामानंदी परंपराओं के साथ सदियों पुराना ऐतिहासिक या धार्मिक संबंध हो। गौरतलब है कि इस बीच, राम मंदिर के दान-चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच एसआईटी कर रही है, जिसमें आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस पूछताछ की जा रही है।

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