Ram Mandir Scam: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन का मामला अब ट्रस्ट के आंतरिक गलियारों में भी तूल पकड़ चुका है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और महंत दिनेंद्र दास महाराज ने पहली बार सार्वजनिक रूप से पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर तीखे हमले किए हैं। महंत ने सीधे तौर पर इस पूरे विवाद के लिए गोपाल राव को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोपाल राव मंदिर की मर्यादा और सदियों पुरानी परंपराओं को दरकिनार कर राजनीति कर रहे हैं। महंत के अनुसार, वे जानबूझकर मामलों को जटिल बना रहे हैं, जिससे न केवल ट्रस्ट की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि मंदिर की गरिमा को भी ठेस पहुंच रही है।
चंपत राय और अन्य के खिलाफ FIR की मांग
मंदिर के भीतर मचे इस बवाल के बीच, अयोध्या की सड़कों पर भी आक्रोश साफ देखा गया। सुबह 11:45 बजे फैजाबाद बार एसोसिएशन के नेतृत्व में 500 से अधिक वकील लामबंद होकर सड़क पर उतर आए। अधिवक्ताओं ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव समेत चार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। आक्रोशित वकीलों का जत्था जब श्रीराम जन्मभूमि थाने की ओर बढ़ रहा था, तो पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया। इसके बावजूद, वकीलों ने सिविल लाइन चौकी पहुंचकर अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस को अल्टीमेटम और कोर्ट जाने की चेतावनी
इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर है। फैजाबाद बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र कुमार जायसवाल ने स्पष्ट किया कि उन्हें पुलिस की ओर से शिकायत की पावती (Receipt) मिल चुकी है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि न्याय के लिए वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। फिलहाल, पुलिस प्रशासन पूरी शिकायत की बारीकी से जांच करने का दावा कर रहा है।
ट्रस्ट में गहराया घोटालों का संकट
महंत दिनेंद्र दास महाराज ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के ट्रस्टी भगवान राम की मर्यादा और परंपराओं का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन गोपाल राव की कार्यशैली इसके बिल्कुल विपरीत है। महंत ने आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन को एक राजनीतिक अखाड़े में तब्दील कर दिया गया है। ट्रस्ट के सदस्यों के बीच इस तरह के खुले आरोप-प्रत्यारोप ने इस बात को पुख्ता कर दिया है कि मंदिर का प्रबंधन और चढ़ावे का लेखा-जोखा अब गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है, जिसका समाधान अब उच्च स्तरीय जांच से ही संभव है।










