Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर चंदा चोरी मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के बयान के बाद अब विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने होसबोले के बयान को अत्यंत संतुलित बताते हुए कहा कि यह संघ की गरिमा के अनुरूप है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना से संपूर्ण हिंदू समाज आहत है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। वीएचपी ने मंदिर ट्रस्ट को भविष्य में दान के प्रबंधन हेतु एक अभेद्य और पारदर्शी प्रणाली विकसित करने का भी निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में एक रुपये का भी हेरफेर न हो सके।
विपक्ष पर सियासी हमले का आरोप
आलोक कुमार ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि चंदा चोरी के मुद्दे का इस्तेमाल आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो पार्टियां आज ‘सियाराम धाम’ बनाने का दावा कर रही हैं, उनका इतिहास ही भगवान राम और राम मंदिर के विरोध से कलंकित रहा है। वीएचपी अध्यक्ष के अनुसार, चुनाव में लाभ पाने के लिए बेबुनियाद आरोप लगाना इन राजनीतिक दलों की हताशा को दर्शाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि रामभक्त इनकी मंशा और इनके अतीत से भली-भांति परिचित हैं।
नाना पटोले के बयान पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
कांग्रेस नेता नाना पटोले द्वारा आरएसएस और वीएचपी को जिम्मेदार ठहराने वाले आरोपों पर आलोक कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि पटोले के पास कोई साक्ष्य है, तो उन्हें एसआईटी (SIT) के सामने पेश होकर अपना बयान दर्ज कराना चाहिए। यदि यह दावे झूठे पाए जाते हैं, तो यह समाज में अशांति और आक्रोश भड़काने की कोशिश है, जिसके लिए उन्हें कानूनी दंड मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व संगठनों को बदनाम करने की यह साजिश किसी भी सूरत में सफल नहीं होगी और इस प्रकार के भ्रामक बयानों के खिलाफ कड़ा कानूनी कदम उठाया जाना अनिवार्य है।
SIT जांच में बड़ा खुलासा
इस बीच, चंदा चोरी कांड की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को इस घोटाले की तह तक जाने में अहम सफलता हाथ लगी है। जांच के दौरान मुख्य आरोपियों में से एक अनुकल्प मिश्रा और उसके बहनोई लवकुश मिश्रा की 12 संपत्तियों का विवरण सामने आया है। पुलिस अब इन संपत्तियों के दस्तावेजों की गहन पड़ताल कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्या मंदिर के चढ़ावे से चोरी की गई राशि का उपयोग अवैध तरीके से अचल संपत्ति खरीदने में किया गया था। इस खुलासे के बाद आरोपियों की मुश्किलें बढ़ना तय है, क्योंकि अपराध से अर्जित धन की पुष्टि होने पर उन पर गंभीर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।










