Ram Mandir Donation Row: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे में कथित अनियमितताओं के मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। ट्रस्ट को भंग करने की मांग को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आरोपी ट्रस्टियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि चंपत राय के इस्तीफे पर आगामी 6 तारीख को होने वाली बैठक में विचार-विमर्श किया जाएगा। आलोक कुमार ने जोर देकर कहा कि वीएचपी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चल रही है और समग्र जांच की मांग को लेकर वे पूरी तरह गंभीर हैं।
चंपत राय के इस्तीफे पर वीएचपी का रुख
चंपत राय के इस्तीफे पर उठे सवालों का जवाब देते हुए आलोक कुमार ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के दो दिन के भीतर ही उनका त्यागपत्र सामने आया, जिसे वे अनुचित नहीं मानते। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी अन्य राजनीतिक घटनाक्रम से तुलना करके बचाव करने का प्रयास नहीं है, बल्कि एक प्रक्रिया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच में किसी भी प्रकार की ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी व्यक्ति इस मामले में दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा और जेल की यात्रा तय करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को पहुंचे इस आघात का एकमात्र मरहम निष्पक्ष जांच और दोषियों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में दंडित होना है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और ट्रस्ट को घेरे में लिया है। कांग्रेस की सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने मांग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट से संबंधित एसआईटी जांच की रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि चंपत राय के खिलाफ केवल इस्तीफा ही काफी नहीं है, बल्कि उनके विरुद्ध विधिवत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जानी चाहिए। कांग्रेस ने इस मामले को आस्था के साथ विश्वासघात करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ने और देश से माफी मांगने की मांग की है।
ट्रस्ट की विश्वसनीयता पर सवाल
सुप्रिया श्रीनेत ने आगे कहा कि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केवल एक सामान्य संस्था नहीं है, बल्कि इसकी घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ट्रस्ट के पदाधिकारी दशकों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं। श्रीनेत ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि जिन्हें प्रभु राम के मंदिर निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उन्हीं लोगों ने राम दरबार को लूटने का काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट में शामिल लोग सत्ता के गलियारों में काफी प्रभावशाली हैं, इसलिए इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच होना अनिवार्य है ताकि जनता का भरोसा बना रहे।










