Ram Mandir Controversy: राम मंदिर गबन मामले पर बोले बृजभूषण सिंह, निष्पक्ष जांच की मांग

अयोध्या राम मंदिर के दानपात्रों से धन की कथित चोरी और वित्तीय गबन के मामले पर पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने विनय कटियार के सवालों का समर्थन करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने अयोध्या में भाजपा की हार के पीछे स्थानीय जनता की अनदेखी को वजह बताया।

Ram Mandir Controversy

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 17, 2026

Ram Mandir Controversy: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से धन की कथित चोरी और वित्तीय गबन के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इस गंभीर मुद्दे पर एक बड़ा और बेबाक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि राम जन्मभूमि आंदोलन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े वरिष्ठ नेता इस विषय को उठा रहे हैं, तो सरकार को इसे कतई हल्के में नहीं लेना चाहिए। पूर्व सांसद के अनुसार, “बिना धुएं के आग नहीं निकलती”, इसलिए श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले की पूरी पारदर्शिता के साथ निष्पक्ष जांच होनी अत्यंत आवश्यक है।

आंदोलनकारी नेताओं का पक्ष

गोंडा में मीडिया से मुखातिब होते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने राम मंदिर आंदोलन से अपने दशकों पुराने और गहरे जुड़ाव को याद किया। उन्होंने बताया कि उनका छात्र जीवन अयोध्या की धरती पर ही बीता है और आंदोलन के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके बेहद करीबी संबंध रहे हैं। लालकृष्ण आडवाणी की ऐतिहासिक रथयात्रा के दौरान सारथी की भूमिका निभाने से लेकर कारसेवकों पर हुए गोलीकांड से ठीक पहले अपनी गिरफ्तारी और बाबरी ढांचा विध्वंस मामले में नामजद आरोपी होने तक का जिक्र कर उन्होंने अपनी बात को वजन दिया।

बृजभूषण शरण सिंह ने जोर देकर कहा कि जब पूर्व सांसद विनय कटियार जैसे कद्दावर आंदोलनकारी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर उंगली उठा रहे हैं, तो उनकी बातों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह विवाद अब केवल मंदिर ट्रस्ट के भीतर का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसके तार अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार की साख से भी जुड़ रहे हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पूरे प्रकरण पर पैनी नजर रख रहे हैं।

श्रद्धालुओं की आस्था को झटका

पूर्व सांसद ने इस बात को पूरी तरह रेखांकित किया कि इस वित्तीय अनियमितता के विवाद से राम मंदिर आंदोलन को सींचने वाले नेताओं की छवि पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए, बल्कि इसका सीधा जवाब मंदिर प्रशासन और व्यवस्था संभालने वाले अधिकारियों को देना होगा। वर्तमान में जो दस्तावेजी सबूत और संगीन आरोप मीडिया के सामने आ रहे हैं, उसने देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों और श्रद्धालुओं के मन में गहरे सवाल और संशय पैदा कर दिए हैं।

बृजभूषण सिंह ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से सनातन समाज को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि यह वैचारिक या राजनीतिक झटका विनय कटियार या उनके जैसे किसी आंदोलनकारी ने नहीं दिया है, बल्कि यह उन लोगों की वजह से हुआ है जो मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और सुरक्षा-प्रबंधन से जुड़े हुए हैं।

अयोध्या में BJP की चुनावी हार की समीक्षा

बृजभूषण सिंह ने केवल मंदिर के गबन मामले पर ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने अयोध्या (फैजाबाद) लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी को मिले राजनीतिक नुकसान का भी कड़ा विश्लेषण किया। उन्होंने आलाकमान को सलाह दी कि इस बात की बेहद गंभीर और जमीनी समीक्षा होनी चाहिए कि आखिर इतनी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक सीट पर पार्टी को शिकस्त क्यों झेलनी पड़ी।

उनका सीधा दावा था कि मंदिर निर्माण, विकास कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर अयोध्या की आम जनता की आवाज और उनकी रोजमर्रा की परेशानियों को लंबे समय तक पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। सुरक्षा कारणों का हवाला देकर कई पारंपरिक रास्तों को अचानक बंद कर दिया गया, जिससे आसपास के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का अयोध्या से सदियों पुराना सामाजिक और व्यावसायिक संपर्क टूट गया। इस तरह वर्षों पुरानी धार्मिक परंपराएं बाधित होने से जनभावनाओं को ठेस पहुंची, जिसका सीधा खामियाजा भाजपा को चुनाव परिणामों में भुगतना पड़ा।

प्रशासनिक प्रमुख का बचाव

ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन से जुड़े विभिन्न अधिकारियों पर चौतरफा उठ रहे तीखे सवालों के बीच, बृजभूषण सिंह ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि नृपेंद्र मिश्रा एक बेहद अनुभवी, ईमानदार और जिम्मेदार अधिकारी हैं। उन्हें जो भी तकनीकी और प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उन्होंने उसका निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया है।

पूर्व सांसद के मुताबिक, जांच से पहले सभी लोगों को एक ही तराजू में तौलना और दोषी ठहराना बिल्कुल गलत है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “मैं नृपेंद्र मिश्रा को इस पूरे मामले में पूरी तरह निर्दोष मानता हूं।” एफआईआर और आगामी कानूनी कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार की जांच एजेंसियां जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी कर देंगी और जो भी असली दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।