UP News: ‘चम्प मतलब लेकर भाग जाना’… राम मंदिर दान चोरी विवाद में चंपत राय पर क्यों भड़के शंकराचार्य?

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित चोरी को लेकर विवाद गहरा गया है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर तंज कसते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, महंत कमल नयन दास ने भी इस मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है, जिसके बाद केंद्र और योगी सरकार सतर्क हैं।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 11, 2026

UP News:  अयोध्या के राम मंदिर में रामभक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान के रुपयों में कथित हेराफेरी और चोरी के आरोपों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस पूरे मामले पर बेहद आक्रामक और तीखा बयान दिया है। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सीधा निशाना साधते हुए उनके नाम का अनोखा व्याकरणिक अर्थ निकाल डाला।

शंकराचार्य ने व्यंग्य करते हुए कहा कि ‘चम्प’ एक संस्कृत धातु है, जिससे ‘चंपत’ शब्द बना है, और इसका सीधा मतलब होता है— ‘लेकर भाग जाना’। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन और शिलापूजन के समय से ही निरंतर गड़बड़ियां और चोरियां हो रही हैं, जहां महज दो-दो मिनट के भीतर लाखों रुपये के प्लॉट करोड़ों के कर दिए गए।

महंत कमल नयन दास ने भी उठाए सवाल

इस गंभीर वित्तीय विवाद में केवल विपक्षी दल या बाहरी संत ही नहीं, बल्कि अयोध्या के भीतर से भी ट्रस्ट के खिलाफ आवाजें बुलंद होने लगी हैं। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने भी इस भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर परोक्ष रूप से प्रहार करते हुए महंत कमल नयन दास ने कहा कि जिन लोगों का कभी साइकिल पर चलने का भी ठिकाना नहीं हुआ करता था, आज वे बड़ी-बड़ी आलीशान इमारतों और संपत्तियों के मालिक बन बैठे हैं।

उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इन आरोपों के कारण अयोध्या और राम मंदिर की देश-दुनिया में बहुत बदनामी हो रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ईमानदारी पर भरोसा जताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने और दोषियों को सख्त दंड देने की मांग की है।

अखिलेश यादव के आरोपों से शुरू हुआ बवाल

राम मंदिर के चढ़ावे और दान राशि के गायब होने की इस पूरी बहस की शुरुआत समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक हालिया बयान से हुई थी। अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि राम मंदिर में देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे का कोई साफ हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है और भारी-भरकम राशि गायब है।

हालांकि, इन आरोपों के तुरंत बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सामने आकर सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया था। चंपत राय का कहना था कि मंदिर का सारा वित्तीय लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी है और इसका बकायदा नियमित ऑडिट किया जा रहा है। इसके बावजूद, विपक्ष और सोशल मीडिया पर लोग उनके इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।

आस्था के केंद्र पर सरकारों की पैनी नजर

चूंकि अयोध्या का राम मंदिर देश और दुनिया के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों और रामभक्तों की अगाध आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है, इसलिए चढ़ावे की रकम को लेकर उठ रहे इन गंभीर सवालों को बेहद संवेदनशीलता से लिया जा रहा है। इस राजनीतिक और धार्मिक घमासान के बीच, केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार दोनों ही स्तरों पर इस पूरे घटनाक्रम और विवाद पर पैनी नजर रखी जा रही है। संतों और विपक्षी नेताओं के लगातार बढ़ते दबाव के बाद अब यह देखना बेहद अहम होगा कि आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों या सरकार की तरफ से क्या प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।