Ram Mandir Donation Case : चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग के आरोप, 30 बैंक खातों पर लगी रोक

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे की रकम के कथित दुरुपयोग की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़े 30 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। जांच एजेंसियां धन के लेनदेन, निवेश और अन्य वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं। मामले में आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।

Ram Mandir Donation Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 10, 2026

Ram Mandir Donation Case : अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में हुई कथित चोरी और अनियमितता के मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि मंदिर के दान से चुराए गए रुपयों का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार में निवेश किया गया था और कुछ रकम ब्याज पर भी उधार दी गई थी। पुलिस की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी इस धनराशि को छिपाने के लिए अपने रिश्तेदारों और बेहद करीबी सहयोगियों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे थे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही है।

आरोपियों के घरों पर SIT की छापेमारी और बैंक खातों पर रोक

बुधवार और गुरुवार को पुलिस ने मुख्य आरोपियों—अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे—के घरों पर छापामारी की। जांच दल ने आरोपियों के रिश्तेदारों से जुड़े 30 बैंक खातों में लेन-देन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रारंभिक वित्तीय जांच में इन खातों में खाताधारकों की आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक का लेनदेन पाया गया है, जो सीधे तौर पर गबन की राशि से जुड़ा प्रतीत होता है। तलाशी के दौरान पुलिस को नकदी के बंडल, सोने के आभूषण (झुमके और लॉकेट) तथा एक कार भी बरामद हुई है, जिसे सबूत के तौर पर जब्त कर लिया गया है।

शेयर बाजार और जमीन में खपाया गया दान का धन

पूछताछ के दौरान आरोपी अनुकल्प मिश्रा और अविनाश ने कथित तौर पर इस बात को स्वीकार किया है कि उन्होंने मंदिर के चढ़ावे से चुराई गई राशि को शेयर बाजार में निवेश किया था। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने इस काला धन को ठिकाने लगाने के लिए एक सुनियोजित जाल बिछाया था। वे पहले रकम को अपने रिश्तेदारों में बांटते थे और फिर उसे घुमा-फिराकर वापस अपने बैंक खातों में अंतरित कर लेते थे ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके। पुलिस को अनुकल्प मिश्रा के घर से एक एकड़ जमीन खरीदने के दस्तावेज भी मिले हैं, जिसे उसने महज 6.7 लाख रुपये में खरीदा था, जबकि बाजार में इसकी कीमत करोड़ों में होने का अनुमान है।

अनियमितताओं के बाद SIT का गठन और आठ गिरफ्तारियां

यह पूरा विवाद जून 2026 के पहले सप्ताह में तब शुरू हुआ, जब राम मंदिर में दान की गई राशि की गिनती के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। ट्रस्ट की शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया गबन के पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज की और मंदिर के दान की गणना प्रक्रिया में शामिल आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इस पूरे रैकेट में शामिल अन्य लोगों और बड़े षड्यंत्र का पर्दाफाश किया जाएगा।

Read More :  PM Modi at MCG: मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड से बड़ा ऐलान, चेन्नई में होगा BBL का ओपनिंग मैच