Ram Mandir Controversy: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की लागत और वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर निर्माण से जुड़े वित्तीय पहलुओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए महिपाल सिंह ने दावा किया है कि परियोजना के शुरुआती अनुमान और वास्तविक खर्च में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने इस संबंध में कई पुख्ता दस्तावेज और साक्ष्य विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दिए हैं, जिससे मामले में हलचल तेज हो गई है।
लागत में भारी वृद्धि और महिपाल सिंह के आरोप
महिपाल सिंह का मुख्य आरोप है कि जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ था, तब राम मंदिर निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 800 करोड़ रुपये तय की गई थी। हालांकि, अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 2,200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उनका कहना है कि लागत में हुई इस भारी-भरकम बढ़ोतरी के कारणों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अतिरिक्त धन कहां और कैसे खर्च हुआ।
उन्होंने दावा किया कि उनके पास निर्माण कार्यों, भुगतानों और लागत से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं, जिन्हें उन्होंने जांच एजेंसी के समक्ष पेश कर दिया है। हालांकि, मंदिर निर्माण से जुड़े ट्रस्ट या संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है।
SIT की कार्रवाई और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बयान
मामले की गंभीरता को देखते हुए 26 जुलाई को पहले से गठित विशेष जांच दल (SIT) के अध्यक्ष और लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने महिपाल सिंह को ई-मेल के जरिए संपर्क कर सबूत पेश करने का अवसर दिया था। एसआईटी ने यह भी स्पष्ट किया था कि जरूरत पड़ने पर उनका बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी दर्ज किया जा सकता है।
चढ़ावे में हेराफेरी और अन्य गंभीर खुलासे
इससे पहले 9 जून को भी महिपाल सिंह ने कई बड़े खुलासे किए थे। उन्होंने एसआईटी को दिए बयानों में निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए हैं:
चढ़ावे में कथित हेराफेरी: उनका दावा है कि साल 2021 में उन्होंने मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी का मामला पकड़ा था। आरोप है कि कुछ लोग बैंककर्मियों की मदद से चढ़ावे की राशि में हेराफेरी करते थे। जब उन्होंने इसकी शिकायत ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से की, तो उन्हें चुप रहने की सलाह दी गई और अगले ही दिन उनकी ड्यूटी हटाकर दूसरे कर्मचारी को तैनात कर दिया गया।
इंजीनियरिंग और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल: महिपाल का आरोप है कि ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण की निगरानी के लिए ऐसे प्रोजेक्ट इंजीनियर (जगदीश आफले) को नियुक्त किया जिनके पास सिविल इंजीनियरिंग का अनुभव नहीं था, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। इसके अलावा, बंशी पहाड़पुर के मुफ्त उपलब्ध पत्थरों की बजाय कथित तौर पर कम गुणवत्ता वाले पत्थर खरीदे गए।
कार्यालय स्थापना और संपत्तियों की खरीद: उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट का कार्यालय स्थापित करने के लिए नियमों को दरकिनार किया गया और कुछ ऐसे लोगों से विवादित संपत्तियां खरीदी गईं जिनका वैध कब्जा नहीं था, जिससे अतिरिक्त मुकदमेबाजी और धन की बर्बादी हुई। साथ ही, पूर्व कैशियर वीरेंद्र वर्मा पर बिना कार्य किए लोगों के नाम भुगतान जारी करने का भी आरोप लगाया गया है।
फिलहाल, इन सभी गंभीर आरोपों की सत्यता SIT की जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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