Ram Mandir News: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए आठों आरोपियों को स्थानीय अदालत ने 13 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। सुरक्षा और प्रक्रियात्मक कारणों से सभी आरोपियों की पेशी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फिलहाल किसी भी आरोपी की रिमांड की मांग नहीं की। अयोध्या जिला न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश/स्पेशल जज (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन) कोर्ट नंबर-1 के न्यायाधीश रजत वर्मा की अदालत में हुई इस सुनवाई ने मामले को और अधिक निर्णायक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
फैजाबाद बार एसोसिएशन का कड़ा रुख
बताते चले कि, इस मामले में आरोपियों के लिए तब मुश्किलें और बढ़ गईं, जब फैजाबाद बार एसोसिएशन ने उनके खिलाफ एक कड़ा और अभूतपूर्व फैसला सुनाया। बार ने स्पष्ट कर दिया है कि मंदिर के चढ़ावे में चोरी करने वाले इन आरोपियों का केस अयोध्या का कोई भी वकील नहीं लड़ेगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि कोई वकील इन आरोपियों की पैरवी के लिए अपना वकालतनामा दाखिल करता है, तो उसे प्रति आरोपी 5 लाख रुपये की बड़ी राशि बार संघ के पास जमा करनी होगी। यह दंड स्वरूप ली गई राशि अभियोजन पक्ष के कानूनी खर्चों में उपयोग की जाएगी।
सीबीआई जांच की मांग और वकीलों का विशेष पैनल
आक्रोशित अधिवक्ताओं ने केवल केस लड़ने से मना ही नहीं किया, बल्कि पूरे घोटाले की गहराई तक जाने के लिए सीबीआई जांच की मांग भी तेज कर दी है। बार अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने घोषणा की है कि 15 वरिष्ठ वकीलों का एक विशेष पैनल गठित किया गया है, जो इस मामले में आरोपियों को कठोर सजा दिलाने के लिए अभियोजन पक्ष के साथ सहयोग करेगा। इसके अलावा, वकीलों का यह समूह राम मंदिर ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है, जिनकी भूमिका इस पूरे भ्रष्टाचार में संदिग्ध मानी जा रही है।
गोपाल राव की तस्वीर से गरमाई सियासत
एसआईटी की जांच में जहां ट्रस्ट के कई सदस्यों और पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए थे, वहीं गोपाल राव की आरती करते हुए एक तस्वीर वायरल होने से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जबकि पहले दावा किया गया था कि उन्हें हटा दिया गया है, उनकी यह सार्वजनिक उपस्थिति सवाल खड़े कर रही है। दूसरी ओर, चंपत राय और अनिल मिश्रा द्वारा इस्तीफे दिए जाने के बाद भी, मुख्य ट्रस्टी और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को लेकर संशय बरकरार है।
विपक्ष का जोरदार हमला
विपक्ष इस मामले को लेकर लगातार बीजेपी सरकार और मंदिर प्रबंधन पर हमलावर है। विपक्षी दलों का सीधा आरोप है कि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को सरकार जानबूझकर सुरक्षा कवच दे रही है। उनका दावा है कि मंदिर में चढ़ावे की यह सुनियोजित चोरी ट्रस्ट के आला अधिकारियों के संरक्षण के बिना संभव नहीं थी। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, सरकार और मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व के लिए यह मामला राजनीतिक रूप से एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।










