Ram Temple Donation Case: राम मंदिर चढ़ावे में सुनियोजित हेराफेरी! बैंक के बड़े अधिकारियों तक पहुंची जांच की आंच

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पुलिस की SIT जांच में अब बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका सामने आई है। दान की गणना में हेरफेर से लेकर आरोपी लवकुश मिश्रा के रातों-रात बने आलीशान घर तक, इस घोटाले की परतें हैरान करने वाली हैं। जानिए इस संगठित अपराध का पूरा सच।

Ram Temple Donation Case

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 29, 2026

Ram Temple Donation Case: राम मंदिर में दान की गई करोड़ों की राशि में हुई चोरी की जांच अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि चढ़ावे में हेरफेर का यह संगठित खेल महज कुछ गणनाकर्मियों के दम पर संभव नहीं था। पुलिस और एसआईटी (SIT) की पड़ताल में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के दो कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध के बजाय सीधे तौर पर सक्रिय पाई गई है। जांच एजेंसियों का स्पष्ट मानना है कि दानराशि की हेराफेरी और रिकॉर्ड में जालसाजी करने के लिए इन बैंककर्मियों की मिलीभगत अपरिहार्य थी, जिसके बिना इतने लंबे समय तक इस खेल को अंजाम नहीं दिया जा सकता था।

गणना प्रक्रिया और बैंक अधिकारियों की संदिग्ध संलिप्तता

बताते चले कि, दानराशि की गणना के दौरान बैंक द्वारा संविदाकर्मी तैनात किए गए थे, लेकिन इन पर निगरानी रखने का पूर्ण दायित्व बैंक के दो कर्मचारी- रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप के कंधों पर था। दानपात्र से नकदी निकालने से लेकर उसे बैंक में सुरक्षित जमा करने तक, ये दोनों हर चरण की निगरानी में शामिल थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन दोनों की संलिप्तता के ठोस सबूत हाथ लगे हैं और जल्द ही उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही, जांच एजेंसियां अब एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी की भूमिका की भी गहन पड़ताल कर रही हैं, क्योंकि बिना किसी उच्च-स्तरीय संरक्षण या जानकारी के इतनी बड़ी धांधली को लंबे समय तक जारी रखना लगभग असंभव है।

कैमरा, रजिस्टर और सुनियोजित गबन का जाल

खुलासा हुआ है कि आरोपी अत्यंत शातिर तरीके से चोरी करते थे। वे गणना के दौरान सुरक्षा कैमरों (CCTV) की नजरों से बचते हुए अपने साथियों का एक घेरा बना लेते थे और इसी आड़ में नकदी पर हाथ साफ कर देते थे। यदि किसी कारणवश मौके पर पैसा निकालना मुमकिन नहीं हो पाता था, तो ‘प्लान बी’ के तहत वे गणना रजिस्टर में ही कुल राशि से चार से पांच लाख रुपये कम दर्ज कर देते थे। बाद में, बैंक में रकम जमा करते समय इस अंतर को अपनी जेब में डाल लिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में बैंककर्मियों की सक्रिय भागीदारी ने इस धांधली को ‘सिस्टम का हिस्सा’ बना दिया था।

अयोध्या पुलिस की SBI बैंक में दबिश

मामले की गंभीरता को देखते हुए अयोध्या पुलिस ने स्थानीय SBI शाखा में छापेमारी की है। क्षेत्राधिकारी (CO) अयोध्या के नेतृत्व में पहुंची पुलिस टीम ने बैंक रिकॉर्ड खंगाले और कर्मचारियों से कड़ाई से पूछताछ की। इस दौरान बैंक कर्मी गगनदीप और रत्नेश को औपचारिक नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। उल्लेखनीय है कि मंदिर में दानपात्रों के संग्रहण और गणना का संपूर्ण अनुबंधित कार्य SBI को सौंपा गया था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस चोरी की जड़ों में और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं।

महज 3 महीने में खड़ा किया आलीशान घर

जांच की एक और दिशा आरोपी लवकुश मिश्रा की संपत्ति की ओर मुड़ गई है। जांचकर्ता अब लवकुश द्वारा बनवाए गए एक नए दो मंजिला मकान की पड़ताल कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, अयोध्या के शहादतगंज इलाके में स्थित यह आलीशान मकान बहुत कम समय में, यानी महज तीन से चार महीनों में बनकर तैयार हुआ है। इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संपत्ति का निर्माण सीधे तौर पर मंदिर के चढ़ावे से हुई अवैध कमाई की ओर इशारा कर रहा है। पुलिस अब आरोपी की आय के ज्ञात स्रोतों और इस संपत्ति के बीच के अंतर को स्पष्ट करने में जुट गई है, जिससे इस बड़े घोटाले की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।