Ram Mandir Ayodhya: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा के लिए 22 जुलाई को एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस महीने में यह दूसरी बार है जब ट्रस्ट के सभी सदस्यों को अयोध्या में एकत्रित होने के निर्देश दिए गए हैं। यह बैठक मणिराम दास छावनी में शाम चार बजे आयोजित होगी। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, इसमें कई प्रशासनिक और सुरक्षात्मक निर्णय लिए जाएंगे।
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चढ़ावा चोरी प्रकरण और एसआईटी की भूमिका
बैठक के एजेंडे का एक बड़ा हिस्सा राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले पर केंद्रित है। इस प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट पर ट्रस्ट के सभी सदस्य विस्तार से चर्चा करेंगे। हाल ही में पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू’ और उसके भतीजे मनीष यादव से 39 घंटे की कस्टडी रिमांड के दौरान गहन पूछताछ की है। अब तक इस मामले में कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ट्रस्ट की इस बैठक में पुलिस जांच की प्रगति और मंदिर की भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष रूप से मंथन होगा।
सीईओ की तैनाती और समितियों का पुनर्गठन
राम मंदिर के सुचारू संचालन और प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए ट्रस्ट इस बैठक में पहली बार ‘मुख्य कार्यकारी अधिकारी’ (सीईओ) की नियुक्ति पर मुहर लगा सकता है। यह कदम मंदिर के प्रबंधन को अधिक पेशेवर और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, ट्रस्ट की विभिन्न समितियों के पुनर्गठन पर भी निर्णय लिया जाएगा। जिन समितियों को अलग-अलग कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनकी संरचना और कार्यप्रणाली में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। बैठक में सदस्यों की वर्तमान कमी को दूर करने और नई नियुक्तियों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा।
नेतृत्व और पूर्व की कार्यवाही की पुष्टि
महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक पिछली छह जुलाई को हुई बैठक की कार्यवाही की औपचारिक पुष्टि करेगी। गौरतलब है कि छह जुलाई को आयोजित बैठक में महत्वपूर्ण संगठनात्मक परिवर्तन देखे गए थे, जिसमें पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों को स्वीकार किया गया था। इस नई बैठक में उन रिक्तियों को भरने और ट्रस्ट को नई दिशा देने पर चर्चा होगी।
यह बैठक राम मंदिर ट्रस्ट के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें न केवल प्रशासनिक ढांचे को मजबूती दी जाएगी, बल्कि चढ़ावा चोरी जैसे गंभीर आरोपों के बाद मंदिर की साख को बहाल करने के लिए सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं। ट्रस्ट के सामने मंदिर की सुरक्षा को और अभेद्य बनाने के साथ-साथ प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता लाने की बड़ी चुनौती है, जिस पर 22 जुलाई को होने वाली बैठक में ठोस निर्णय लिए जाने की प्रबल संभावना है।
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