Ram Mandir Ayodhya: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान के पैसे के कथित रूप से गायब होने को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है। सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा एसआईटी जांच से ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ अलग होने के दावे पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव ने पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।
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अखिलेश यादव का सीधा हमला
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा पोस्ट साझा कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे और उनके भाषण पर तीखे सवाल दागे। अखिलेश यादव ने कहा कि अब केवल साधारण बातों से काम नहीं चलेगा, बल्कि पाई-पाई का हिसाब जनता के सामने रखना होगा। अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा, “जनता कह रही है कि अब केवल ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ‘सोने का सोना और चांदी की चांदी’ करनी होगी। मंदिर में चढ़ाए गए भारी-भरकम पैसों, देश-विदेश से आई अनमोल शिलाओं के अलावा बहुमूल्य धातुओं और जेवरों का भी पूरा हिसाब सरकार और प्रशासन को देना ही पड़ेगा।”
सपा प्रमुख ने सीएम योगी के अयोध्या दौरे पर तंज कसते हुए कहा, “आज के भाषण में बयान कम और धमकी अधिक क्यों दिखाई दे रही थी? आज वहां चेहरा उतरा हुआ क्यों था? आवाज़ को तो जानबूझकर ऊंची करने का पूरा प्रयास किया गया, लेकिन भीतर का आत्मविश्वास शून्य क्यों नजर आ रहा था? इस बार मुख्यमंत्री अपने ही खास लोगों से क्यों नहीं मिले?”
SIT पर शंका: अखिलेश ने आरोप लगाया कि भौतिक रूप से अयोध्या का भ्रमण कर उस एसआईटी के काम को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जो पहले से ही अपने विवादास्पद सदस्यों और कलंकित छवि के कारण भारी शंकाओं के घेरे में है।
सीएम योगी आदित्यनाथ की साजिश वाली थ्योरी
इससे ठीक पहले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या का दौरा कर राम मंदिर को लेकर चल रहे विवादों पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कुछ ताकतें जानबूझकर अयोध्या की छवि को वैश्विक स्तर पर धूमिल करने का प्रयास कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी और अन्य विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, “जो लोग अपने जीवन में कभी अयोध्या नहीं आए, वे आज अचानक राम भक्ति के बारे में बात कर रहे हैं। जिन लोगों ने कभी भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए थे और राम भक्तों की अटूट आस्था का क्रूरता से अपमान किया था, वे अब राम भक्ति का चोला ओढ़ रहे हैं।”
सीएम योगी ने कहा, “जब भी भारत और सनातन संस्कृति एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तब-तब देश विरोधी साजिशकर्ताओं की नींद उड़ जाती है। वे नई-नई साजिशें रचने लगते हैं। अयोध्या को बदनाम करने और श्री राम जन्मभूमि के बारे में बेबुनियाद सवाल उठाने का यह प्रयास भी उसी बड़ी साजिश का एक हिस्सा है।”
‘हमने 500 साल इंतजार किया, क्या 15 दिन नहीं कर सकते?’ – संतों से अपील
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के संतों, महंतों और आम भक्तों से इस राजनीतिक विवाद और साजिशों में न पड़ने का पुरजोर आग्रह किया। भगवान राम के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने 14 साल का वनवास सहर्ष स्वीकार किया, लेकिन पिता की आज्ञा का उल्लंघन नहीं किया; हमें भी उसी मर्यादा को बनाए रखना है।
मुख्यमंत्री ने राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को गठित की गई तीन सदस्यीय एसआईटी का हवाला देते हुए कहा, “हमने इस भव्य मंदिर के लिए 500 सालों का लंबा इंतजार किया है। क्या हम जांच रिपोर्ट के लिए 15 दिन और इंतजार नहीं कर सकते? किसी को भी बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं है। एसआईटी का गठन पूरी निष्पक्षता के लिए किया गया है और यह सच को सबके सामने लाकर रहेगी।” सीएम योगी ने कड़े लहजे में कहा कि हर व्यक्ति और संस्था की अपनी एक गरिमा होती है। अगर किसी के पास चढ़ावे में गड़बड़ी से जुड़ा कोई भी पुख्ता सबूत है, तो उसे मीडिया में उछालने या सार्वजनिक करने के बजाय सीधे एसआईटी को सौंपना चाहिए। जो भी व्यक्ति इस पवित्र स्थान पर झूठे आरोप लगाएगा, उसे नोटिस मिलने पर जांच दल के सामने अपने सबूत पेश करने ही होंगे।
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