
Shaurya Diwas : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शौर्य दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के पैदल सैनिकों यानी इन्फैंट्री के अदम्य साहस, वीरता और बलिदान को नमन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए इन्फैंट्री के जवानों ने हर दौर में असाधारण दृढ़ता का परिचय दिया है। उनके मुताबिक, 1947 के ऐतिहासिक युद्धों से लेकर आज की चुनौतीपूर्ण सीमाओं तक भारतीय सैनिकों ने मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। रक्षा मंत्री ने देश की रक्षा में जुटे सैनिकों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता भी व्यक्त की।
मुश्किल हालात में भी मोर्चे पर डटे रहे जवान
राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में भारतीय इन्फैंट्री की उस परंपरा को याद किया, जिसमें सैनिक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मोर्चे पर मजबूती से डटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी देश को उनकी सबसे अधिक जरूरत पड़ी, जवानों ने पीछे हटने के बजाय दृढ़ता के साथ चुनौतियों का सामना किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियां हों या सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियां, पैदल सैनिकों ने अपने प्रशिक्षण, अनुशासन और साहस के बल पर जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनका यह योगदान भारतीय सेना की कार्यक्षमता और देश की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सर्वोच्च बलिदान से मजबूत हुई देश की सुरक्षा
रक्षा मंत्री ने उन सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को भी याद किया, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि जवानों ने भारत को सुरक्षित और सम्मान के साथ खड़ा रखने के लिए हर संभव प्रयास किया है। सैनिकों का समर्पण केवल सैन्य मोर्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। शौर्य दिवस जैसे अवसरों पर इन बलिदानों को याद करना देशवासियों को उन लोगों के योगदान से परिचित कराता है, जिनकी वजह से राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार जारी हैं।
भारतीय सशस्त्र बलों की गौरवशाली परंपरा
राजनाथ सिंह ने इन्फैंट्री के जवानों की कर्तव्यनिष्ठा, असाधारण साहस और बलिदान के लिए हमेशा तैयार रहने की भावना को सशस्त्र बलों की सर्वोत्तम परंपराओं का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि सैनिक कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने दायित्वों से पीछे नहीं हटते। उनका अनुशासन और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। रक्षा मंत्री के संदेश का मुख्य भाव यह रहा कि देश की सुरक्षा में लगे जवानों का सम्मान करना और उनके योगदान को याद रखना पूरे राष्ट्र की जिम्मेदारी है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के अगले चरण पर जोर
शौर्य दिवस पर संदेश से पहले राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जारी प्रयासों पर भी जोर दिया था। भारतीय नौसेना के वार्षिक सेमिनार ‘स्वावलंबन 2026’ के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश की आत्मनिर्भरता की कोशिशें अब दूसरे चरण में प्रवेश कर रही हैं। इस चरण में नवाचार करने वाले लोगों, विशेषज्ञों और नए विचारों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। रक्षा उत्पादन में स्वदेशी तकनीक और नए समाधानों को बढ़ावा देना भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
आत्मनिर्भरता के लक्ष्य और समयसीमा तय करने का सुझाव
रक्षा मंत्री ने सुझाव दिया कि उन क्षेत्रों की स्पष्ट सूची तैयार की जानी चाहिए, जिनमें भारत को आत्मनिर्भर बनना है। साथ ही प्रत्येक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समयसीमा भी तय होनी चाहिए। इससे रक्षा क्षेत्र में चल रहे प्रयासों की प्रगति का आकलन करना और प्राथमिकताओं के अनुसार संसाधनों का इस्तेमाल करना आसान हो सकता है। राजनाथ सिंह के संदेश में एक ओर सैनिकों के साहस और बलिदान के प्रति सम्मान दिखाई दिया, तो दूसरी ओर रक्षा उत्पादन, नवाचार और स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान भी नजर आया।
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