Rajnath Singh: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान पड़ोसी देशों, विशेषकर पाकिस्तान और चीन का नाम लिए बिना उन पर कड़ा प्रहार किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का “पड़ोसी जरा सिरफिरा है” और उसकी अनिश्चित हरकतों को देखते हुए देश को हमेशा युद्ध स्तर पर तैयार रहना होगा। इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव कंपनी के दौरे पर पहुंचे राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि हमें यह नहीं पता कि कब हथियारों की जरूरत पड़ जाए, इसलिए डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना अब केवल विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी निर्भरता को कम करके ही हम अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में प्राइवेट सेक्टर की 50% भागीदारी का लक्ष्य
रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र (Private Sector) की बढ़ती भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि एक समय था जब पूरा डिफेंस सेक्टर केवल सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) तक सीमित था और प्राइवेट सेक्टर के बारे में कोई सोचता भी नहीं था। राजनाथ सिंह ने घोषणा की कि सरकार का लक्ष्य रक्षा निर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी को कम से कम 50% तक ले जाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमें निजी क्षेत्र की क्षमता पर पूरा भरोसा है और तकनीक से लेकर निर्माण तक हर क्षेत्र में वे अहम भूमिका निभा रहे हैं।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि: 2030 के लिए बड़ा लक्ष्य
पिछले 10 वर्षों में रक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति के आंकड़े साझा करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि 2014 में घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 46,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। उन्होंने इसे निजी क्षेत्र की भागीदारी का सुखद परिणाम बताया। रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी भारत ने लंबी छलांग लगाई है; जो निर्यात पहले मात्र 1,000 करोड़ रुपये था, वह अब 25,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि 2030 तक भारत का रक्षा निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाए, जिससे भारत हथियारों के उत्पादन का ग्लोबल हब बन सके।
बदलते युद्ध का स्वरूप: रूस-यूक्रेन संघर्ष से सीख
राजनाथ सिंह ने वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान समय में युद्ध की प्रकृति (Nature of War) तेजी से बदल रही है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और हालिया अन्य संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज युद्ध कभी महीनों चलते हैं, तो कभी कुछ घंटों में समाप्त हो जाते हैं। युद्ध की तीव्रता (Intensity) लगातार बढ़ रही है, जिसे देखते हुए भारत को अपनी तैयारी ‘युद्ध स्तर’ पर रखनी होगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्धों में हर मिनट और हर फैसले का महत्व होता है, इसलिए हमारी तैयारी व्यापक और मजबूत होनी चाहिए।
नागास्त्र का आधुनिक वर्जन और स्वदेशी प्लेटफार्म पर जोर
रक्षा मंत्री ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित ‘नागास्त्र’ के आधुनिक वर्जन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भविष्य में शत्रुओं के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होगा। उन्होंने दोहराया कि भारत धीरे-धीरे अपने प्लेटफार्म, सिस्टम और सब-सिस्टम को पूरी तरह स्वदेशी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। अंत में उन्होंने फिर पड़ोसी की अप्रत्याशित हरकतों पर आगाह करते हुए कहा कि सिरफिरे पड़ोसी की किसी भी हरकत का जवाब देने के लिए स्वदेशी हथियारों का भंडार होना देश की संप्रभुता के लिए सबसे जरूरी है।
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