राजस्थान पुलिस ने लिया कड़ा कदम, अपराधियों की फोटो मीडिया और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने पर रोक

 जयपुर  राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों की निजता और उनके मानवीय अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध शाखा), डॉ. हवा सिंह घुमरिया ने एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करते हुए प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी अभियुक्त की फोटो या वीडियो अब सार्वजनिक नहीं करेंगे। यह निर्णय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा  दिए गए एक आदेश की अनुपालना में लिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को गरिमा

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Published On :

जनवरी 23, 2026

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 जयपुर
 राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों की निजता और उनके मानवीय अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध शाखा), डॉ. हवा सिंह घुमरिया ने एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करते हुए प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी अभियुक्त की फोटो या वीडियो अब सार्वजनिक नहीं करेंगे।

यह निर्णय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा  दिए गए एक आदेश की अनुपालना में लिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। पुलिस के अनुसार, "अभियुक्त केवल आरोपित होता है, दोषी नहीं", इसलिए गिरफ्तारी के बाद उसकी निजता को भंग करना कानून सम्मत नहीं है। नए दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें :
सोशल मीडिया पर पाबंदी : पुलिस अब किसी भी आरोपी की फोटो या वीडियो अपने आधिकारिक या अनौपचारिक सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड नहीं कर सकेगी।

मीडिया ट्रायल पर रोक : प्रेस ब्रीफिंग के दौरान आरोपी को अपमानजनक स्थिति में पेश नहीं किया जाएगा। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि को बढ़ावा न दें जिससे 'मीडिया ट्रायल' की स्थिति पैदा हो।
मर्यादित शब्दावली : पुलिस ब्रीफिंग के दौरान अभियुक्तों के लिए उपयोग किए जाने वाले शब्दों में गरिमा और सावधानी बरतनी होगी।
विशेष संवेदनशीलता : महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के आरोपितों के साथ व्यवहार के दौरान विशेष संवेदनशीलता रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षित हिरासत और सभ्य व्यवहार SOP में यह भी कहा गया है कि अभियुक्त को बैठाने, ले जाने और हिरासत में रखने की व्यवस्था सुरक्षित और सभ्य होनी चाहिए। पुलिस अब किसी भी आरोपी को सार्वजनिक रूप से अपमानित या अपराधी की तरह प्रदर्शित नहीं कर पाएगी।

यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राजस्थान में लागू कर दिया गया है। इसकी प्रतियां महानिदेशक पुलिस (DGP) सहित सभी महत्वपूर्ण विभागों को भेज दी गई हैं ताकि इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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