Rajasthan News: राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश, सीमावर्ती मस्जिद-मदरसों पर कार्रवाई रहेगी जारी

राजस्थान हाई कोर्ट ने भारत-पाकिस्तान सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित अवैध मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 14, 2026

Rajasthan News: राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाते हुए भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के संवेदनशील दायरे में स्थित कई मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों के खिलाफ चल रही प्रशासनिक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। सोमवार (13 जुलाई) को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी भी प्रकार के धार्मिक भेदभाव से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और वैधानिक कानूनों के अनुपालन से संबंधित है। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को एक विशेष समिति गठित करने का निर्देश दिया है, जो प्रत्येक विवादित ढांचे की अलग-अलग जांच करेगी और कानून के दायरे में आगे की कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

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जज समीर जैन ने खारिज कीं दरगाह समितियों की याचिकाएं

उच्च न्यायालय के एकल पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति समीर जैन ने पीर मोहम्मद शाह जिलानी दरगाह समिति और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर की गई याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया। इन याचिकाओं के माध्यम से जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जैसे सीमावर्ती जिलों के जिला प्रशासनों द्वारा जारी किए गए बेदखली और तोड़फोड़ के नोटिसों को अदालत में चुनौती दी गई थी।

प्रशासन द्वारा जारी नोटिसों में गंभीर आरोप लगाए गए थे कि इन धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों ने सक्षम प्राधिकारियों से आवश्यक वैधानिक अनुमति लिए बिना ही सरकारी और कृषि योग्य भूमियों पर बड़े पैमाने पर पक्के और स्थायी निर्माण कर लिए हैं। संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह अवैध रूप से जमीनों पर कब्जा करने और बिना अनुमति निर्माण करने को नियमों का खुला उल्लंघन माना गया है।

सुरक्षा एजेंसियों ने जताई बड़ी चिंता

अदालत में सरकार का पक्ष रख रहे वकीलों ने विभिन्न खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा अधिकारियों की इनपुट का हवाला देते हुए पक्ष रखा। अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र रणनीतिक और सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है। खुफिया रिपोर्टों में यह चिंता जताई गई है कि बिना किसी वैध अनुमति के खड़े किए गए ये संदिग्ध निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।

सरकारी वकीलों ने दलील दी कि सीमा पार पाकिस्तान से होने वाली हथियारों व नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ के खतरों को देखते हुए इन अवैध ढांचों को तत्काल हटाया जाना बेहद जरूरी है। सुरक्षा के इन गंभीर आयामों को देखते हुए ही उच्च न्यायालय ने इन ढांचों के खिलाफ चल रही प्रशासनिक कार्रवाई में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने या रोक लगाने से मना कर दिया।

हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

याचिकाकर्ताओं की ओर से दी गई दलीलों पर टिप्पणी करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने कानून के एक बड़े सिद्धांत को रेखांकित किया। अदालत ने कहा कि कानून में प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) का सिद्धांत और सुनवाई का अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे इस हद तक लागू नहीं किया जा सकता जिससे देश की सुरक्षा ही दांव पर लग जाए। अदालत ने साफ किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में गोपनीय और खुफिया जानकारियों का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया जा सकता।

अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह एक निष्पक्ष समिति का गठन करे जो हर मामले का व्यक्तिगत अध्ययन करे। यह समिति कानून के स्थापित प्रावधानों के तहत अपनी सिफारिशें देगी, जिसके आधार पर ही अग्रिम विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। तब तक इन संवेदनशील क्षेत्रों में नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन की कार्रवाई जारी रह सकेगी।

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