Rajasthan News: प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुस्कुराए मंत्री? 18 गर्भवती महिलाओं की मौत पर घमासान

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में 18 प्रसूताओं की मौत और कई महिलाओं के गंभीर रूप से बीमार होने के मामले में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का बेहद असंवेदनशील रवैया सामने आया है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 14, 2026

Rajasthan News: राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और प्रशासनिक संवेदनहीनता का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सूबे में पिछले कुछ दिनों के भीतर 18 गर्भवती महिलाओं (प्रसूताओं) की मौत और लगभग 50 अन्य महिलाओं के गंभीर रूप से बीमार होने के संवेदनशील मुद्दे पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का रवैया विवादों के घेरे में आ गया है। इस बेहद गंभीर और दर्दनाक हादसे पर दुख व्यक्त करने या दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय, स्वास्थ्य मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। इतना ही नहीं, वह पत्रकारों के तीखे सवालों का जवाब देने के बजाय मुस्कुराते हुए कुर्सी से उठ खड़े हुए और ‘ब्रेक के बाद जवाब देने’ की बात कहकर चलते बने। मंत्री का यह गैर-जिम्मेदाराना और असंवेदनशील व्यवहार अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी आलोचना का विषय बना हुआ है।

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राजस्थान में प्रसूताओं की मौत का आंकड़ा पहुंचा 18

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में बांसवाड़ा जिले में 5 और भीलवाड़ा जिले में 4 गर्भवती महिलाओं की प्रसव के बाद अचानक तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। इससे पहले कोटा, जोधपुर और बीकानेर जैसे बड़े शहरों में भी प्रसूताओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले सामने आ चुके हैं।

अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा की मौतों को मिलाकर यह आंकड़ा बढ़कर 18 तक पहुंच चुका है, जबकि 50 से अधिक महिलाएं जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं। इस सामूहिक मौतों के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है और सरकारी अस्पतालों की बुनियादी सुविधाओं व दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दवा में मिला था ‘सिर्फ पानी’, फिर भी लापरवाही मानने को तैयार नहीं मंत्री जी

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा स्वास्थ्य विभाग की ही शुरुआती जांच में हुआ था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्रसव के दौरान महिलाओं को लगाए जाने वाले ‘ऑक्सीटोसिन’ इंजेक्शन (जो ब्लीडिंग रोकने और गर्भाशय के संकुचन के लिए बेहद जरूरी दवा है) के बैच में भारी मिलावट थी। इस इंजेक्शन के नाम पर प्रसूताओं को महज सादा पानी चढ़ाया जा रहा था।

इतने बड़े घोटाले और जानलेवा लापरवाही के बावजूद, जयपुर में बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री खींवसर विभागीय कमियों को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखे। 3 घंटे तक चली इस समीक्षा बैठक के बाद जब वे मीडिया के सामने आए, तो उन्होंने मौत की वजहों को घुमाना शुरू कर दिया। कभी वे महिलाओं में ‘डिहाइड्रेशन के कारण किडनी फेल’ होने का तर्क देते नजर आए, तो कभी अन्य मौसमी बीमारियों का बहाना बनाते दिखे।

राष्ट्रीय औसत का दिया तर्क और हंसते हुए बोले- ‘बाकी बातें ब्रेक के बाद’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी और विभाग की पीठ थपथपाते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने एक हैरान करने वाला दावा किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रसूताओं की मौत का जो औसत प्रतिशत है, राजस्थान का आंकड़ा भी लगभग उसी के आसपास है। जब पत्रकारों ने एक ही समय में इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों और ‘नकली/पानी वाले’ इंजेक्शनों की सप्लाई पर तीखे सवाल पूछे, तो मंत्री के पास कोई ठोस जवाब नहीं था।

वे न तो किसी त्वरित जांच समिति के गठन की घोषणा कर सके और ना ही किसी अधिकारी या सप्लायर पर कार्रवाई की बात कह पाए। इसके बजाय, सवालों की बौछार होते ही वह चेहरे पर मुस्कान लाते हुए अपनी सीट से उठ गए। जाते-जाते उन्होंने कहा कि वे मंगलवार को बांसवाड़ा और बुधवार को भीलवाड़ा के जमीनी हालात का जायजा लेने जा रहे हैं, इसलिए ‘बाकी के जवाब वे ब्रेक के बाद (दौरे से लौटने के बाद) ही देंगे।’ एक तरफ पीड़ित परिवारों में कोहराम मचा है और दूसरी तरफ जिम्मेदार पद पर बैठे मंत्री का ऐसा रुख सरकार की संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

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