Maharashtra News: राज ठाकरे ने हार स्वीकारते हुए भरी हुंकार, कहा- ‘अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई’

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव परिणामों के बाद मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे 'धनशक्ति बनाम शिवशक्ति' की लड़ाई करार देते हुए कार्यकर्ताओं के संघर्ष की सराहना की। ठाकरे ने स्पष्ट किया कि कम सीटें मिलने के बावजूद मनसे मराठी अस्मिता और भाषा के लिए अपनी लंबी लड़ाई जारी रखेगी और सत्ताधारियों को मजबूती से जवाब देगी।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 17, 2026

Maharashtra News: महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया साझा की है। उन्होंने ‘सस्नेह जय महाराष्ट्र’ के साथ अपने संदेश की शुरुआत करते हुए चुनाव में जीत हासिल करने वाले मनसे और शिवसेना के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को हार्दिक बधाई दी।

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सत्ता और धनशक्ति बनाम शिवशक्ति की कड़ी चुनौती

बताते चले कि, राज ठाकरे ने चुनावी माहौल का विश्लेषण करते हुए कहा कि इस बार का चुनावी सफर बेहद चुनौतीपूर्ण था। उनके अनुसार, यह मुकाबला सामान्य नहीं था, बल्कि एक तरफ अपार धन-बल और सत्ता का अहंकार था, तो दूसरी तरफ ‘शिवशक्ति’ का अटूट संकल्प। उन्होंने कार्यकर्ताओं के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि संसाधनों की कमी के बावजूद मनसे और शिवसेना के सैनिकों ने जिस वीरता के साथ संघर्ष किया, वह वास्तव में प्रशंसनीय है। उनके इस कठिन परिश्रम की जितनी भी तारीफ की जाए, वह कम है।

चुनावी हार से निराश नहीं, विपक्ष की भूमिका में मनसे का कड़ा रुख

आपको बता दे कि, मनसे प्रमुख ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि पार्टी को इस बार उतनी सफलता नहीं मिली जितनी उन्हें उम्मीद थी। उन्होंने कहा, “नतीजे हमारे पक्ष में नहीं रहे, इसका दुख जरूर है, लेकिन हम मैदान छोड़कर भागने वालों में से नहीं हैं।” ठाकरे ने संकल्प जताया कि चुने गए मनसे नगरसेवक अपने क्षेत्रों में सत्ता पक्ष के लिए एक मजबूत और मुखर विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मराठी मानुष के हितों के साथ कोई भी खिलवाड़ हुआ, तो उनके पार्षद चुप नहीं बैठेंगे और सत्ताधारियों को मुंहतोड़ जवाब देंगे।

मराठी अस्मिता और प्रादेशिक भाषा के संरक्षण का अटूट संकल्प

राज ठाकरे ने अपने संबोधन में पार्टी की विचारधारा को दोहराते हुए कहा कि उनकी लड़ाई किसी पद के लिए नहीं, बल्कि मराठी मानुष, मराठी भाषा और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि एक समृद्ध महाराष्ट्र का निर्माण ही उनका अस्तित्व है। ठाकरे ने कहा कि ऐसी विचारधारा की लड़ाइयां लंबी होती हैं। उन्होंने आत्म-मंथन की बात करते हुए कहा कि संगठन में कहां कमी रह गई, क्या गलतियां हुईं और भविष्य की क्या रणनीति होगी, इसका गहन विश्लेषण किया जाएगा और जल्द ही सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

सत्ताधारियों द्वारा मराठी मानुष के दमन के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

एमएमआर (मुंबई महानगर क्षेत्र) और पूरे राज्य की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग और उनके संरक्षण में पल रहे तत्व मराठी मानुष को हाशिए पर धकेलने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी और कहा कि चुनाव जीतना या हारना एक प्रक्रिया है, लेकिन हमारी प्राथमिकता हमेशा ‘मराठी सांस’ होनी चाहिए। उन्होंने अपने संदेश के अंत में कार्यकर्ताओं को नए जोश के साथ काम पर लौटने और संगठन के पुनर्निर्माण में जुटने का आह्वान किया।

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