Raj Kundra ED Bitcoin Investigation: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए मुंबई की एक विशेष अदालत ने बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और व्यवसायी राज कुंद्रा को समन जारी किया है। चर्चित ‘गेन बिटकॉइन पोंजी स्कैम’ (Gain Bitcoin Ponzi Scam) मामले में कोर्ट ने कुंद्रा के साथ-साथ दुबई के व्यापारी राजेश सतीजा को भी पेश होने का आदेश दिया है।
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ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कुंद्रा पर गंभीर आरोप
बताते चले कि, प्रवर्तन निदेशालय ने सितंबर 2025 में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी पूरक चार्जशीट दाखिल की थी। इस दस्तावेज़ में राज कुंद्रा और राजेश सतीजा को मुख्य आरोपी के रूप में नामजद किया गया है। ईडी की जांच के अनुसार, अमित भारद्वाज (घोटाले का मास्टरमाइंड) ने यूक्रेन में एक ‘बिटकॉइन माइनिंग फार्म’ स्थापित करने के लिए राज कुंद्रा को 285 बिटकॉइन हस्तांतरित किए थे। एजेंसी का दावा है कि हालांकि यह प्रोजेक्ट कभी धरातल पर नहीं उतरा, लेकिन उक्त डिजिटल मुद्रा आज भी कुंद्रा के पास सुरक्षित है।
285 बिटकॉइन की वर्तमान कीमत
आपको बता दे कि, जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि कुंद्रा को मिले इन 285 बिटकॉइन की मौजूदा बाजार वैल्यू 150 करोड़ रुपये से अधिक है। ईडी का आरोप है कि यह पूरी राशि अपराध की कमाई है। राज कुंद्रा ने पूछताछ के दौरान खुद को केवल एक ‘मध्यस्थ’ के रूप में पेश करने की कोशिश की, लेकिन एजेंसी ने उनके इस तर्क को खारिज कर दिया है। ईडी के मुताबिक, कुंद्रा और महेंद्र भारद्वाज के बीच हुए ‘टर्म शीट’ समझौते से यह सिद्ध होता है कि असली लाभार्थी कुंद्रा ही थे।
दस्तावेजों की अनुपलब्धता पर सवाल
समाचार सूत्रों के अनुसार, कुंद्रा ने जांच के दौरान दावा किया कि उन्होंने केवल डील कराई थी, लेकिन वे इसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य या कानूनी दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। ईडी ने अदालत को बताया कि तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कुंद्रा का ‘बिचौलिया’ होने का बयान पूरी तरह अमान्य है। एजेंसी को संदेह है कि उन्होंने जानबूझकर जांच को गुमराह करने के लिए यह झूठा तर्क गढ़ा है।
साक्ष्य नष्ट करने का आरोप
इस मामले का सबसे पेचीदा पहलू वह डिजिटल वॉलेट है जिसमें बिटकॉइन ट्रांसफर किए गए थे। ईडी का कहना है कि राज कुंद्रा को 7 साल बाद भी पांच किस्तों में मिले बिटकॉइन की सटीक संख्या याद है, जो दर्शाता है कि उनका नियंत्रण उन पर बना हुआ है। हालांकि, जब उनसे वॉलेट एड्रेस मांगा गया, तो उन्होंने दावा किया कि उनका iPhone X खराब हो चुका है और डेटा रिकवर नहीं हो सकता। ईडी ने इसे सबूतों को नष्ट करने और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को छिपाने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास बताया है।
अदालत की कार्रवाई और आगामी सुनवाई पर टिकी निगाहें
मुंबई की विशेष PMLA कोर्ट द्वारा समन जारी किए जाने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। राज कुंद्रा और राजेश सतीजा को अब अदालत के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा। इस घोटाले की जड़ें करोड़ों रुपये के पोंजी निवेश से जुड़ी हैं, जिसने हजारों निवेशकों को प्रभावित किया है।
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