Rahul Gandhi vs Anurag Thakur : अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के खिलाफ दिया विशेषाधिकार हनन नोटिस , ‘अंधभक्त’ टिप्पणी पर विवाद

संसद में 'अंधभक्त' टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस दिया है। इस कदम के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। अब सभी की नजरें संसद की अगली कार्रवाई और इस विवाद के संभावित राजनीतिक असर पर हैं।

Anurag Thakur

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 30, 2026

Rahul Gandhi vs Anurag Thakur :  संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। विभिन्न मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल किया है। यह नोटिस 29 जुलाई को लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा दिए गए भाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर प्रस्तुत किया गया है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष के नेता की टिप्पणी संसद की गरिमा और संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं थी।

नियम 222 और 223 के तहत की गई कार्रवाई की मांग

अनुराग ठाकुर ने लोकसभा के नियम 222 और 223 के तहत यह विशेषाधिकार हनन नोटिस लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा है। अपने नोटिस में उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने सदन में चर्चा के दौरान “Students”, “Idiots” और “Andhbhakts” जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जिन्हें भाजपा ने असंसदीय और अपमानजनक बताया है। उनका कहना है कि संसद के भीतर ऐसी भाषा का उपयोग लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय शिष्टाचार के विपरीत है। भाजपा सांसद ने इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।

संसदीय नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप

अपने नोटिस में अनुराग ठाकुर ने लोकसभा की प्रक्रिया और कार्य-संचालन से जुड़े नियम 352 (ii), 352 (iii) और 352 (vii) का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द न केवल अपमानजनक थे, बल्कि उन्होंने सदन की कार्यवाही की गरिमा को भी प्रभावित किया। भाजपा सांसद के अनुसार, इस प्रकार की टिप्पणी से लोकसभा के विशेषाधिकारों का उल्लंघन हुआ है और संसद की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। उन्होंने आग्रह किया कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाए और संसदीय नियमों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएं।

अब क्या होगी संसदीय प्रक्रिया?

विशेषाधिकार हनन का नोटिस मिलने के बाद अब अगला निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में होगा। अध्यक्ष पहले यह तय करेंगे कि नोटिस प्रथम दृष्टया विचार योग्य है या नहीं। यदि उन्हें लगता है कि मामला जांच के योग्य है, तो इसे संसद की विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जा सकता है। समिति पूरे मामले की जांच करेगी, संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण लेगी और अपनी रिपोर्ट के आधार पर लोकसभा अध्यक्ष को सिफारिशें सौंपेगी। इसके बाद सदन में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

राहुल गांधी ने अपने भाषण में क्या कहा था?

29 जुलाई को लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्हें यह समझना चाहिए कि एक विशेष वैचारिक संगठन उन्हें “अंधभक्त” बनाना चाहता है। उनके भाषण की शुरुआत में इस्तेमाल किए गए एक अन्य शब्द पर भी सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई। भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की भाषा संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं थी और इससे सदन की गरिमा प्रभावित हुई। इसी बयान को आधार बनाकर विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया गया है।

संसदीय कार्य मंत्री और अध्यक्ष ने भी जताई आपत्ति

राहुल गांधी के भाषण के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता ने एक छात्रा का नाम लेकर जिस शब्द का इस्तेमाल किया, वह असंसदीय माना जाता है और उसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी राहुल गांधी से कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्हें संसद की गरिमा और नियमों का ध्यान रखते हुए विधेयक पर अपनी बात रखनी चाहिए। सत्ता पक्ष के लगातार विरोध के बीच राहुल गांधी ने आगे बोलने से इनकार कर दिया और अपनी सीट पर बैठ गए।

संसद में बढ़ सकती है राजनीतिक तकरार

इस घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। भाजपा इसे संसदीय परंपराओं और सदन की गरिमा का मामला बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि सरकार आलोचनात्मक आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है। अब सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी है कि वह इस विशेषाधिकार हनन नोटिस पर क्या रुख अपनाते हैं। यदि मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा जाता है, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

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