Sanatan Dharma Debate : राहुल गांधी के त्रिपुंड तिलक पर सियासी घमासान, शिवराज सिंह चौहान ने दिया सनातन संदेश

राहुल गांधी की त्रिपुंड तिलक वाली तस्वीर ने नई सियासी बहस छेड़ दी है। शिवराज सिंह चौहान ने महादेव और श्रीराम को राजनीति से ऊपर बताया, जबकि पवन खेड़ा ने बीजेपी पर निशाना साधा। आखिर धार्मिक प्रतीकों को लेकर दोनों दलों के बीच यह बयानबाजी कहां तक पहुंचेगी?

Sanatan Dharma Debate

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 28, 2026

Advertisements
728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

Sanatan Dharma Debate : मानहानि मामले में बरी होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी की त्रिपुंड तिलक वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस तस्वीर को लेकर दोनों दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। अब केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए भगवान शिव और भगवान श्रीराम की आस्था को राजनीति से अलग रखने का संदेश दिया है। उनके बयान के बाद यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा?

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि भगवान शिव और भगवान श्रीराम किसी राजनीतिक दल के नहीं हैं। वे करोड़ों लोगों की आस्था और सनातन संस्कृति के शाश्वत प्रतीक हैं। उन्होंने अपने संदेश में हिंदू धर्म की परंपराओं और देवी-देवताओं के बीच आध्यात्मिक एकता का उल्लेख किया। चौहान के मुताबिक, धार्मिक आस्था को राजनीतिक दलों के नजरिए से देखने के बजाय उसके व्यापक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को समझना चाहिए।

हरि और हर के एकत्व का किया उल्लेख

शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोस्ट में भगवान विष्णु और भगवान शिव के एकत्व की अवधारणा को भी सामने रखा। उन्होंने लिखा कि हरि और हर अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि एक ही परम तत्व के दो स्वरूप हैं। इसी एकत्व को सनातन परंपरा में हरिहर कहा जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और महादेव एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि परस्पर श्रद्धा, प्रेम और भक्ति के प्रतीक हैं। उनके संदेश का मुख्य उद्देश्य धार्मिक आस्था को राजनीतिक खांचों में बांटने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाना था।

महादेव और श्रीराम को राजनीति से जोड़ने पर उठाए सवाल

केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में कहा कि यह विडंबना है कि कभी भगवान शिव को बीजेपी के विरोध में खड़ा करने की कोशिश होती है, तो कभी ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष को राजनीतिक नजरिए से देखा जाता है। उन्होंने सवाल किया कि जब भगवान शिव स्वयं श्रीराम के आराध्य हैं, तो उनकी भक्ति के नाम पर श्रीराम से दूरी कैसे बनाई जा सकती है? इसी तरह, भगवान शिव की पूजा करने वाले श्रीराम की भक्ति को भी किसी राजनीतिक विचारधारा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

आस्था जोड़ती है, राजनीति की संकीर्णता तोड़ती है: शिवराज

शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि ईश्वर को राजनीति में बांटने वालों को यह समझना चाहिए कि आस्था लोगों को जोड़ने का काम करती है, जबकि राजनीति की संकीर्णता समाज में विभाजन पैदा कर सकती है। उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन ‘हरि में हर हैं, हर में हरि हैं’ के संदेश के साथ किया। साथ ही ‘जय श्रीराम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारे भी लगाए। उनके इस बयान को राहुल गांधी की त्रिपुंड तिलक वाली तस्वीर पर जारी राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है।

पवन खेड़ा ने बीजेपी पर साधा निशाना

इस विवाद के बीच कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी की तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधा। खेड़ा ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी के त्रिपुंड तिलक वाली तस्वीर पोस्ट करने से बीजेपी नेताओं को परेशानी क्यों हो रही है? उन्होंने अपने पोस्ट में व्यंग्यात्मक अंदाज अपनाते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोध के चलते भगवान और धार्मिक प्रतीकों पर भी किसी एक दल का अधिकार जताने जैसी स्थिति पैदा की जा रही है।

राहुल गांधी की तस्वीर से बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी

राहुल गांधी की तस्वीर को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब धार्मिक प्रतीकों, सनातन परंपरा और राजनीति के संबंधों पर बहस का रूप ले चुका है। एक तरफ शिवराज सिंह चौहान ने भगवान शिव और श्रीराम की आस्था को दलगत राजनीति से ऊपर रखने की बात कही, वहीं पवन खेड़ा ने बीजेपी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। फिलहाल, दोनों दलों के नेताओं के बयानों से राजनीतिक माहौल गर्म है। इस पूरे घटनाक्रम में धार्मिक आस्था और राजनीतिक बयानबाजी के बीच संतुलन का सवाल प्रमुखता से सामने आया है।