MP Rajya Sabha Election: यूपी से टिकट नहीं मिला तो मध्य प्रदेश से हुई एंट्री, हरदीप पुरी पर बीजेपी का बड़ा दांव

MP Rajya Sabha Election: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों पर अब विराम लगता दिख रहा है। बीजेपी ने उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। पुरी फिलहाल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और उनका मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म होने वाला है। ऐसे में बीजेपी ने कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही उन्हें दूसरी सीट से उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है। बीजेपी ने बुधवार, 28 अक्टूबर को उनके नाम का ऐलान किया। मध्य प्रदेश की यह सीट एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई

MP Rajya Sabha Election

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 28, 2026

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MP Rajya Sabha Election: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों पर अब विराम लगता दिख रहा है। बीजेपी ने उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। पुरी फिलहाल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और उनका मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म होने वाला है। ऐसे में बीजेपी ने कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही उन्हें दूसरी सीट से उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है।

बीजेपी ने बुधवार, 28 अक्टूबर को उनके नाम का ऐलान किया। मध्य प्रदेश की यह सीट एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। हरदीप पुरी को इसी सीट से चुनाव लड़ाने का फैसला किया गया है। इस कदम के बाद माना जा रहा है कि केंद्र सरकार में उनकी भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर भी काफी हद तक विराम लग गया है।

12 नवंबर को होगा मतदान

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की खाली सीट पर चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने 22 अक्टूबर को कार्यक्रम घोषित किया था। इस सीट के लिए 12 नवंबर को वोटिंग होनी है। बीजेपी ने अब हरदीप पुरी को उम्मीदवार बनाकर चुनावी तस्वीर साफ कर दी है।पुरी का राज्यसभा में दोबारा पहुंचना इसलिए भी अहम है, क्योंकि उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा था। अगर उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया जाता, तो उनके मंत्री पद और मोदी कैबिनेट में उनकी जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ सकते थे। लेकिन मध्य प्रदेश से टिकट मिलने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ मिल गया है।

यूपी राज्यसभा चुनाव में नाम कटने के बाद उठे थे सवाल

हरदीप सिंह पुरी का नाम जब उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी की उम्मीदवार सूची में नहीं आया, तो राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। सवाल उठने लगे थे कि क्या पुरी का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से भी बाहर होना पड़ेगा?इसके साथ ही मोदी सरकार में कैबिनेट विस्तार की अटकलें भी तेज हो गई थीं। हालांकि, मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद इन चर्चाओं पर काफी हद तक विराम लग गया है।

पुरी साल 2021 से केंद्र सरकार में पेट्रोलियम मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह शहरी विकास मंत्रालय में भी काम कर चुके हैं। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अहम फैसलों में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है।

आईएफएस अधिकारी से केंद्रीय मंत्री तक का सफर

हरदीप सिंह पुरी राजनीति में आने से पहले भारतीय विदेश सेवा यानी आईएफएस के अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने जनवरी 2014 में बीजेपी का दामन थामा था। इसके बाद पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें अमृतसर से उम्मीदवार बनाया।

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हालांकि, उस चुनाव में पुरी को कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद बीजेपी ने उन्हें केंद्र सरकार में अहम जिम्मेदारी दी और बाद में राज्यसभा के जरिए संसद में पहुंचाया। अब मध्य प्रदेश से उनकी उम्मीदवारी को पार्टी के भीतर उनके महत्व के तौर पर भी देखा जा रहा है।

तेल संकट के बीच हरदीप पुरी की भूमिका क्यों अहम?

हरदीप पुरी को ऐसे समय में राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल को लेकर हालात काफी संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में भारत के लिए सस्ती दरों पर कच्चा तेल खरीदना और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना बड़ी चुनौती है।

मंगलवार को रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर बोलते हुए पुरी ने साफ किया था कि भारतीय रिफाइनरियां उन आपूर्तिकर्ताओं से कच्चा तेल खरीदेंगी, जो बेहतर कीमत देंगे। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।

रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देश मॉस्को की तेल से होने वाली कमाई कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद भारत अपनी जरूरतों और कीमतों को ध्यान में रखकर ऊर्जा संबंधी फैसले लेता रहा है।

पुरी ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी तरह का दबाव महसूस नहीं किया है। ऐसे में मध्य प्रदेश से उनकी राज्यसभा उम्मीदवारी को राजनीतिक और ऊर्जा क्षेत्र, दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है।