Sonam Wangchuk Hunger Strike: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में कथित धांधली और शिक्षा क्षेत्र की बदहाली के खिलाफ जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हटाए जाने के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस घटना के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के कार्य करने के तरीके को ‘असत्य और हिंसा’ पर आधारित बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक अहिंसक भूख हड़ताल पर बैठे व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार पूरी तरह से अनुचित और अलोकतांत्रिक है।
मुद्दों पर सरकार की चुप्पी
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में न केवल सोनम वांगचुक के प्रति एकजुटता दिखाई, बल्कि सरकार को उन ज्वलंत मुद्दों की याद दिलाई जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, “पेपर लीक, शिक्षा की आसमान छूती लागत और छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याएं आज भारत के भविष्य के लिए सबसे गंभीर चुनौतियां हैं।” उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इन गंभीर समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन आवाजों को कुचलने का प्रयास कर रही है जो देश के छात्रों के हक की बात कर रहे हैं। राहुल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि चाहे कोई भी ताकत आ जाए, भारत के छात्रों और उनके समर्थकों को इन बुनियादी मुद्दों को उठाने से कोई नहीं रोक पाएगा।
सफदरजंग अस्पताल में सोनम वांगचुक की निगरानी
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किए जाने की प्रक्रिया 18 जुलाई की सुबह पूरी की गई। अपने अनशन के 21वें दिन, वांगचुक के स्वास्थ्य में आई भारी गिरावट को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया। दिल्ली पुलिस का आधिकारिक तर्क है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से मेडिकल विशेषज्ञों की राय और दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया निर्देशों के अनुपालन में की गई है। लंबे समय तक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) और कमजोरी के कारण वांगचुक की स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही थी। उन्हें फिलहाल डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है ताकि उनके स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके।
कड़े सुरक्षा घेरे में अस्पताल
सोनम वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती होते ही वहां की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। अस्पताल परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है। प्रशासन किसी भी प्रकार के जन-आक्रोश या विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग कर रहा है। अस्पताल की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर की गई यह भारी घेराबंदी अब एक अलग बहस का विषय बन गई है, जिसमें प्रदर्शनकारी इसे ‘लोकतांत्रिक आवाजों के दमन’ का एक और उदाहरण मान रहे हैं। आंदोलन के प्रति बढ़ते जनसमर्थन और विपक्ष के तेवर देखते हुए यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ेगा।










