Rahul Gandhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल हुए साहिल लोचब के मामले में आखिरकार दिल्ली पुलिस ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा थाने के बाहर किए गए करीब सात घंटे के लंबे धरने के बाद सामने आई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 और 125 के तहत यह मामला दर्ज किया है और इसकी कॉपी राहुल गांधी को सौंप दी गई है।
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न्याय की दिशा में पहला कदम: राहुल गांधी
मामले की जानकारी देते हुए राहुल गांधी ने इसे न्याय की दिशा में पहला कदम बताया। उन्होंने कहा कि साहिल लोचब को गोली लगे हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक न्याय नहीं मिल रहा था। उन्होंने बताया कि पीड़ित के शरीर में अभी भी कई छर्रे धंसे हुए हैं, जिनमें से तीन छर्रे उसकी आंख में हैं जिससे उसे दिखाई नहीं दे रहा है, और कुछ छर्रे उसके दिल के पास मौजूद हैं।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली के बीचों-बीच स्थित इस पुलिस स्टेशन में भी न्याय मिलने में इतनी मुश्किलें आ रही हैं, तो छोटे शहरों और गांवों के हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस अधिकारी और थाना स्टाफ इस मामले में पहले से कार्रवाई करना चाहता था, लेकिन ऊपर यानी गृह मंत्रालय के उच्च स्तर से इस पर रोक लगाई जा रही थी।
बीजेपी का पलटवार: ‘ओछी और अराजक राजनीति’
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नadka ने संसद मार्ग थाना परिसर स्थित डीसीपी कार्यालय के बाहर दिए गए इस धरने को “ओछी और अराजक राजनीति” करार दिया है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का यह प्रदर्शन न तो किसी छात्र के हक के लिए था और न ही न्याय के लिए, बल्कि यह केवल उनकी राजनीतिक हताशा और मीडिया फुटेज हासिल करने की भूख को दर्शाता है। भाजपा का यह भी आरोप है कि कांग्रेस पार्टी का यह कदम ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का एक प्रयास मात्र था।
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