Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर राखी बांधने से पहले न भूलें ये काम, जानें पूजा का शुभ समय

रक्षाबंधन 2026 का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। राखी बांधने से पहले पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भाई की पूजा, तिलक और आरती के बाद दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। जानिए रक्षाबंधन 2026 का शुभ मुहूर्त, राहुकाल, पूजा सामग्री और राखी बांधने की सही विधि।

Raksha Bandhan 2026

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 21, 2026

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी बांधने से पहले विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि शुभ समय में रक्षाबंधन की पूजा करने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति बनी रहती है।

इस समय बांधें भाई को राखी

साल 2026 में रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन राखी बांधने के लिए शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ अवधि में पूजा और राखी बांधने की रस्म पूरी करना अच्छा माना जाता है। ऐसे में बहनें पूजा की तैयारी पहले से करके शुभ मुहूर्त में भाई को राखी बांध सकती हैं।

पूर्णिमा तिथि कब शुरू और खत्म होगी?

रक्षाबंधन का पर्व सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगी। इसी वजह से रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पूजा और राखी बांधने के लिए शुभ समय का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।

रक्षाबंधन 2026 पूजा में राहुकाल का रखें ध्यान

रक्षाबंधन के दिन पूजा और राखी बांधते समय राहुकाल का भी ध्यान रखने की धार्मिक मान्यता है। 28 अगस्त को राहुकाल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक बताया गया है। इस अवधि में राखी बांधने या विशेष पूजा करने से बचने की सलाह दी जाती है। परिवार शुभ मुहूर्त के अनुसार ही पूजा की रस्म पूरी कर सकता है।

रक्षाबंधन पर किन देवी-देवताओं की पूजा करें?

रक्षाबंधन की पूजा में भाई की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए देवी-देवताओं का स्मरण किया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन घर के मुख्य द्वार या दीवार पर गेरू और चावल के घोल से श्रवण कुमार का चित्र बनाने और उनकी पूजा करने की परंपरा भी बताई गई है। इसके साथ भगवान गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जा सकती है।

रक्षाबंधन पूजा विधि: भाई को कैसे बैठाएं?

राखी बांधने से पहले भाई को पूजा के लिए लकड़ी के पाट पर बैठाना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। पूजा की थाली में पहले से जरूरी सामग्री तैयार रखें, ताकि शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा और राखी बांधने की रस्म बिना किसी रुकावट के पूरी की जा सके।

रक्षाबंधन पूजा की थाली में क्या-क्या रखें?

रक्षाबंधन पूजा की थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, दीपक, राखी और मिठाई रखी जाती है। पूजा शुरू करने से पहले घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भाई के सिर पर रुमाल या कोई साफ कपड़ा रखें। फिर कुमकुम, हल्दी और अक्षत से भाई के माथे पर मंगल तिलक लगाया जाता है।

राखी बांधने की सही विधि और तीन गांठों का महत्व

तिलक लगाने के बाद भाई की आरती उतारें और फिर उसकी दाहिनी कलाई पर राखी बांधें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राखी में तीन गांठें लगाना शुभ माना जाता है। इन तीन गांठों को सुख, सुरक्षा और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसके बाद भाई को मिठाई खिलाएं और बहन के प्रति अपने प्रेम और आशीर्वाद का भाव व्यक्त करें।

रक्षाबंधन 2026 पर पूजा में रखें परंपरा और शुभ मुहूर्त का ध्यान

रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का अवसर भी है। पूजा के दौरान परिवार की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का पालन किया जाता है। हालांकि, अलग-अलग पंचांग और क्षेत्रों में शुभ मुहूर्त को लेकर थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा और राखी बांधने से पहले स्थानीय पंचांग के समय की भी पुष्टि करना उचित रहेगा।