Rahul Gandhi Lucknow Visit: लखनऊ में राहुल गांधी की हुंकार, कांशीराम के अधूरे मिशन और जातिगत जनगणना पर चला बड़ा दांव

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान से राहुल गांधी ने 2027 के महासंग्राम का शंखनाद कर दिया है! 'सामाजिक परिवर्तन दिवस' पर उन्होंने कांशीराम की राजनीतिक सफलता को याद करते हुए जातिगत जनगणना को अपना सबसे बड़ा हथियार बताया। क्या राहुल की यह 'बहुजन राजनीति' यूपी में बीजेपी और बसपा का खेल बिगाड़ देगी?

Rahul Gandhi Lucknow Visit

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 13, 2026

Rahul Gandhi Lucknow Visit: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘संविधान सम्मेलन’ के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के अतीत और संगठनात्मक कमियों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की सफलता का विश्लेषण करते हुए एक बड़ा बयान दिया। राहुल ने स्वीकार किया कि कांग्रेस के भीतर कुछ बुनियादी कमियां थीं, जिसके कारण कांशीराम को अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने का मौका मिला। उन्होंने कहा, “अगर कांग्रेस ने समय रहते पिछड़ों और दलितों के हक में अपना काम सही ढंग से किया होता, तो कांशीराम जी को अलग रास्ता चुनने की आवश्यकता नहीं पड़ती।” राहुल ने यह भी जोड़ा कि यदि पंडित जवाहरलाल नेहरू लंबे समय तक जीवित होते, तो संभवतः कांशीराम कांग्रेस के ही मुख्यमंत्री होते।

स्वास्थ्य और रोजगार में भेदभाव: भागीदारी के सवाल पर केंद्र को घेरा

सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र की वर्तमान सरकार पर संसाधनों के असमान वितरण का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने सामाजिक ढांचे में मौजूद गहरी खाई की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज देश के किसी भी बड़े अस्पताल में दलित, पिछड़े या आदिवासी वर्ग से आने वाले डॉक्टर ढूंढना लगभग नामुमकिन हो गया है। राहुल ने डेटा का हवाला देते हुए कहा कि हमारा संविधान ‘जितनी आबादी, उतनी भागीदारी’ के सिद्धांत पर आधारित है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। उन्होंने मनरेगा का उदाहरण देते हुए बताया कि मेहनत-मजदूरी की लिस्ट में तो 85% लोग दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक हैं, लेकिन जब सम्मानजनक पदों की बात आती है, तो ये वर्ग गायब हो जाते हैं।

आरएसएस के नेतृत्व पर सवाल: शीर्ष पदों से वंचित पिछड़ा वर्ग

राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संगठनात्मक ढांचे पर सीधा हमला बोला। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की सूची उठाकर देख ली जाए, वहां आपको ओबीसी, दलित या आदिवासी समुदाय का एक भी व्यक्ति नहीं मिलेगा। उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ देश की 85% आबादी बैठी है, जिसे केवल नाम के लिए ‘हिंदुस्तानी’ कहा जा रहा है। राहुल के अनुसार, जब देश की संपत्ति के बंटवारे, शासन चलाने या सत्ता की असली चाबी सौंपने की बात आती है, तब इस वर्ग को दरकिनार कर दिया जाता है। उन्होंने इसे संविधान की मूल भावना के साथ विश्वासघात करार दिया।

आंबेडकर, गांधी और कांशीराम का आदर्श: समझौता न करने की जिद

विभिन्न ऐतिहासिक महापुरुषों की तुलना करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी और कांशीराम में एक बात समान थी—इन लोगों ने अपने सिद्धांतों और शोषित वर्ग के हितों के साथ कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने विनायक दामोदर सावरकर का नाम लेते हुए उन पर कटाक्ष किया और कहा कि भाजपा और उनके संगठन की पुरानी आदत समझौता करने की रही है। राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके चेहरे की बनावट और उनके फैसलों में असुरक्षा साफ झलकती है, जो देश के लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।

ऊर्जा सुरक्षा और जातिगत जनगणना: कांग्रेस का भविष्य का रोडमैप

लेख के अंत में राहुल गांधी ने देश की ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ (ऊर्जा सुरक्षा) पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पूर्व नौकरशाह को तेल मंत्री बनाकर नरेंद्र मोदी ने देश की सुरक्षा से समझौता किया है। राहुल ने दावा किया कि अब अमेरिका यह तय कर रहा है कि भारत अपना तेल कहां से और किस दाम पर खरीदेगा। अपनी भावी रणनीति स्पष्ट करते हुए उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी ने अब जातिगत जनगणना कराने का अटल मन बना लिया है। उन्होंने संकल्प लिया कि अब दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को केवल वोट बैंक नहीं समझा जाएगा, बल्कि उन्हें सत्ता के ‘पावर सेंटर’ में वास्तविक जगह दिलाई जाएगी।

Read More:  Kal Ka Mausam: बारिश का अलर्ट या धूप से लोग बेहाल? जानें दिल्ली समेत अन्य राज्यों का हाल