Rahul Gandhi Letter PM: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की पुरजोर मांग की है। राहुल गांधी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर अपनी मांग साझा की है। पिछले कुछ समय से राहुल गांधी लगातार कांशीराम के योगदान की सराहना कर रहे हैं और उनके समर्थन में बयान दे रहे हैं। कांग्रेस द्वारा मरणोपरांत भारत रत्न की यह मांग राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दलित मतदाताओं को साधने की एक बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
नेहरू और कांशीराम को लेकर राहुल का बड़ा दावा
राहुल गांधी ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि यदि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जीवित होते, तो कांशीराम कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए जाते। राहुल के इस बयान पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि कांशीराम ने अपने पूरे जीवन में कांग्रेस की नीतियों का विरोध किया और इसी विरोध के आधार पर बहुजन समाज पार्टी की नींव रखी थी। गौरतलब है कि नेहरू का निधन 1964 में हुआ था, जबकि कांशीराम 1978 में बामसेफ (BAMCEF) की स्थापना के साथ सक्रिय राजनीति में उभरे और 1984 में बसपा का गठन किया।
“कांग्रेस की विफलता ही कांशीराम की सफलता का कारण”
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘संविधान सम्मेलन’ के दौरान राहुल गांधी ने कांशीराम की जयंती (15 मार्च) से पूर्व उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राहुल ने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि यदि कांग्रेस ने समाज के पिछड़े और दलित वर्गों के लिए अपना काम ठीक से किया होता, तो कांशीराम को अलग रास्ता चुनने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने कहा, “कांशीराम जी समाज में समानता की बात करते थे। कांग्रेस अपना काम पूरी तरह से नहीं कर सकी, यही कारण है कि कांशीराम जी सफल हुए। अगर कांग्रेस ने अपना दायित्व सही ढंग से निभाया होता, तो वे कभी सफल न होते।” यह बयान कांग्रेस की आत्म-समीक्षा और दलित राजनीति में फिर से जगह बनाने की कोशिश को दर्शाता है।
85 प्रतिशत आबादी की अनदेखी और बीजेपी पर हमला
संविधान सम्मेलन में राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार देश की 85 प्रतिशत आबादी की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी को समान अधिकार देता है, लेकिन आज समाज को 15 और 85 प्रतिशत के दो हिस्सों में बांट दिया गया है। राहुल के अनुसार, देश के संसाधनों और नीतियों का लाभ केवल ऊपर के 15 प्रतिशत लोगों को मिल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का विकास तभी संभव है जब पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को उनकी संख्या के आधार पर हक मिले।
सावरकर बनाम गांधी-अंबेडकर-कांशीराम: विचारधारा की लड़ाई
राहुल गांधी ने महापुरुषों की तुलना करते हुए सावरकर और कांशीराम के बीच के अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम जैसे नेताओं ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। राहुल ने कहा, “गांधी जी सालों जेल में रहे लेकिन झुके नहीं। बाबासाहेब ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया पर समझौता नहीं किया। उसी तरह कांशीराम ने भी कभी सत्ता के सामने समर्पण नहीं किया क्योंकि वे न्याय के प्रति प्रतिबद्ध थे।” कांग्रेस के ओबीसी और एससी विभागों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आधिकारिक रूप से कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित किया गया, जो 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी का स्पष्ट संकेत है।










