Rahul Gandhi: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर अमेरिका और केंद्र सरकार दोनों पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद अमेरिका की ओर से न तो संवेदना व्यक्त की गई और न ही किसी प्रकार का खेद जताया गया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह मामला केवल तीन भारतीयों की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की गरिमा और सम्मान से भी जुड़ा हुआ है।
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अमेरिका के बयान पर राहुल गांधी की नाराजगी
राहुल गांधी ने अमेरिकी प्रशासन के उस बयान पर आपत्ति जताई जिसमें कथित तौर पर अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन करने और नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त न करने की बात कही गई थी। कांग्रेस नेता का कहना है कि इस तरह की भाषा किसी स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि जब किसी घटना में भारतीय नागरिकों की जान चली गई हो, तब सबसे पहले संवेदना और जवाबदेही दिखाई जानी चाहिए थी। इसके विपरीत अमेरिका की ओर से सख्त चेतावनी वाले शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी सवाल
राहुल गांधी ने इस पूरे मामले में केंद्र सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। कांग्रेस नेता के अनुसार, किसी भी देश के लिए उसके नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में अपेक्षित स्तर की प्रतिक्रिया देने में विफल रही है।
प्रधानमंत्री मोदी पर साधा निशाना
अपने बयान में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामले पर प्रधानमंत्री की ओर से कोई मजबूत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राहुल गांधी ने दावा किया कि देश के सम्मान और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को अधिक सक्रिय और मुखर भूमिका निभानी चाहिए थी। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति मजबूत होने के बावजूद इस मामले में अपेक्षित कूटनीतिक दबाव नहीं बनाया गया।
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विदेश नीति को लेकर उठे नए सवाल
इस घटना के बाद भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर भी बहस तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को भारतीय नागरिकों से जुड़े मामलों में अधिक सख्ती दिखानी चाहिए, जबकि सरकार समर्थक इसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जैसे रणनीतिक क्षेत्र में होने वाली घटनाओं का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ता है।










