Parivartini ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। चातुर्मास के दौरान आने वाली परिवर्तिनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के मन में सबसे महत्वपूर्ण सवाल अगले दिन यानी व्रत के पारण के समय को लेकर होता है।
पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण अगले दिन 23 सितंबर 2026 को सुबह 6:10 बजे से 8:35 बजे के बीच किया जाएगा। पारण हमेशा द्वादशी तिथि के भीतर ही करना अत्यधिक महत्वपूर्ण और फलदायी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एकादशी व्रत का समापन हमेशा सूर्योदय के बाद ही किया जाना चाहिए। साथ ही, यह भी विशेष रूप से ध्यान रखना आवश्यक है कि ‘हरि वासर’ की अवधि के दौरान कभी भी व्रत नहीं खोलना चाहिए, क्योंकि इस काल में पारण करना वर्जित माना गया है।
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एकादशी व्रत पारण में तुलसी का विशेष महत्व

व्रत के पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर सबसे पहले भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके बाद तुलसी दल (पत्ती) ग्रहण करके और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए अपना व्रत खोलना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। सनातन संस्कृति में तुलसी को शुद्धता, सात्विकता और अनन्य विष्णु भक्ति का प्रतीक माना गया है। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का स्थान सर्वोपरि है। यही कारण है कि तुलसी दल मिले हुए चरणामृत को ग्रहण करने के बाद ही एकादशी व्रत को खोलने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है।
व्रत का पारण करते समय बहुत भारी, गरिष्ठ या तले-भुने भोजन से परहेज करना चाहिए। हमेशा हल्के, सुपाच्य और सात्विक भोजन के साथ ही अपने व्रत का समापन करना सेहत और धर्म दोनों की दृष्टि से बेहतर माना जाता है।
व्रत पारण के दौरान किन बातों का रखें विशेष ध्यान?

एकादशी का व्रत केवल उपवास रखना नहीं है, बल्कि इसके नियमों का समापन के समय भी पूरा पालन करना जरूरी होता है।
हरि वासर का त्याग: जैसा कि पहले बताया गया, हरि वासर के समय कभी भी पारण न करें। हमेशा द्वादशी तिथि के उचित और निर्धारित समय के भीतर ही व्रत खोलें।
समय सीमा का ध्यान: इस बात का विशेष ध्यान रखें कि द्वादशी तिथि समाप्त होने से ठीक पहले अपना पारण अवश्य पूरा कर लें।
आहार पर नियंत्रण: पारण के तुरंत बाद जरूरत से ज्यादा या अत्यधिक भारी भोजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है।
तामसिक भोजन से दूरी: पारण के दिन या उसके बाद भी तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा और अत्यधिक मसालेदार चीजों के सेवन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
सदाचार: व्रत के समापन के दिन किसी भी प्रकार के क्रोध, वाद-विवाद, अपशब्दों का प्रयोग और किसी का भी अपमान करने से बचना चाहिए।
भगवान विष्णु के करवट बदलने की पौराणिक मान्यता

चातुर्मास के दौरान आने वाली इस एकादशी को लेकर एक बेहद खास पौराणिक मान्यता जुड़ी है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी शयन अवस्था के दौरान करवट बदलते हैं, इसीलिए इसे ‘परिवर्तिनी एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। इस पावन तिथि को पार्श्व एकादशी, पद्मा एकादशी या वामन एकादशी के रूप में भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु को एक आंख वाला नारियल (एकाक्षी नारियल) अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने और कर्ज से मुक्ति व धन वृद्धि की कामना करने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा संपन्न होने के बाद उस एकाक्षी नारियल को पीले या लाल रंग के साफ वस्त्र में लपेटकर अपने घर की तिजोरी में रख देना चाहिए। इससे घर में बरकत और सुख-समृद्धि हमेशा बनी रहती है।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।










