Rahul Gandhi: पश्चिम एशिया तनाव के बीच गैस किल्लत पर बरसे राहुल गांधी, पूछा- हर संकट में सबसे पहले गरीब ही क्यों मरते हैं?

पश्चिम एशिया तनाव के बीच देश में गहराए एलपीजी गैस संकट को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला है। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार की कूटनीतिक चूक से उद्योग वेंटिलेटर पर हैं और मजदूर पलायन कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि हर बार संकट का बोझ गरीबों पर ही क्यों डाल दिया जाता है।

Rahul Gandhi

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 6, 2026

Rahul Gandhi: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है, जिसका सीधा असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई पर भी दिखने लगा है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश में गहराते एलपीजी गैस सिलेंडर संकट को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार इस वैश्विक आपदा से निपटने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर सीधा हमला

बताते चले कि, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर एलपीजी संकट से ठीक उसी तरह से निपट रही है, जैसे उसने पूर्व में कोविड-19 महामारी की भयानक आपदा को संभाला था।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा: “मोदी जी ने कहा था कि ‘हम एलपीजी गैस संकट को उसी तरह संभालेंगे जैसे हमने कोविड को संभाला था।’ और वास्तव में, उन्होंने ठीक वैसा ही किया। बिल्कुल कोविड की तरह—नीति का घोर अभाव, धरातल पर शून्य लेकिन बड़ी-बड़ी खोखली घोषणाओं से भरा हुआ, और अंत में सारा बोझ देश के गरीब नागरिकों पर डाल दिया गया।”

उन्होंने आगे कहा कि प्रतिदिन 500 से 800 रुपये की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी कामगारों के लिए खाना पकाने की गैस (LPG) अब पूरी तरह से पहुंच से बाहर और महंगी हो गई है। हालात ऐसे बदतर हो गए हैं कि रात में मजदूरी करके घर लौट रहे एक गरीब के पास चूल्हा जलाने तक के पैसे नहीं बच रहे हैं।

कूटनीतिक विफलता के कारण चरमराई देश की अर्थव्यवस्था

कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की गलत नीतियों की वजह से देश का रीढ़ कहा जाने वाला मजदूर वर्ग आज पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गया है।

राहुल गांधी ने अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र की बदहाली पर प्रकाश डालते हुए कहा:

  • उद्योगों की सांसें अटकीं: हमारा कपड़ा उद्योग (वस्त्र क्षेत्र) पहले से ही आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है। पूरा विनिर्माण क्षेत्र आज खुलकर सांस लेने के लिए तरस रहा है और संघर्ष कर रहा है।
  • कूटनीतिक विफलता: इस पूरे संकट की जड़ सरकार की उस ‘कूटनीतिक चूक’ में छिपी है जो अंतरराष्ट्रीय वार्ता की मेज पर हुई। लेकिन यह अहंकारी सरकार आज तक अपनी इस भारी भूल को स्वीकार करने से साफ इनकार कर रही है।
  • पलायन की मजबूरी: जब देश चलाने वालों का अहंकार ही सरकार की मुख्य नीति बन जाता है, तो अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाती है। इसके परिणामस्वरूप मजदूर शहरों को छोड़कर फिर से गांवों की तरफ पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं।

विपक्ष का सरकार से सवाल

अपने बयान के अंत में राहुल गांधी ने देश की जनता को झकझोरते हुए एक बेहद भावनात्मक और कड़ा सवाल पूछा। उन्होंने जनता से इस अन्याय के खिलाफ अपनी चुप्पी तोड़ने और आवाज बुलंद करने का पुरजोर आग्रह किया। उन्होंने पूछा, “आखिर ऐसा क्यों होता है कि देश पर आने वाले हर छोटे-बड़े संकट में सबसे पहले गरीब ही पिसता है और मरता है? देशवासियों, अब चुप मत रहो। यह सिर्फ देश के गरीबों की रोटी का सवाल नहीं है; यह हम सभी के भविष्य और अस्तित्व से जुड़ा हुआ सवाल है।”

पीएम मोदी की सीसीएस बैठक और सरकारी पक्ष

दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही संसद में देश को आगाह कर दिया था कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उपजी कठिन वैश्विक परिस्थितियां काफी लंबे समय तक खिंच सकती हैं। उन्होंने पूरे राष्ट्र से अपील की थी कि जैसे हम सबने मिलकर एकजुट होकर कोरोना महामारी का डटकर मुकाबला किया था, ठीक वैसे ही इस कठिन दौर में भी हमें एकजुट और तैयार रहने की जरूरत है।

सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी इस प्रकार है:

  • सुरक्षा और आपूर्ति पर नजर: प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हाल ही में ‘कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी’ (CCS) की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें आम नागरिकों के लिए जरूरी चीजों और एलपीजी की उपलब्धता का बारीकी से आकलन किया गया।
  • सख्त निर्देश: पीएम मोदी ने सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि युद्ध के इस वैश्विक प्रभाव से देश के नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रभावी कदम उठाए जाएं।
  • भ्रामक सूचनाओं पर रोक: प्रधानमंत्री ने देशवासियों से किसी भी प्रकार की गलत सूचना या अफवाहों से पूरी तरह बचने की अपील की है। साथ ही सरकार को एक पारदर्शी, समयबद्ध और प्रामाणिक सार्वजनिक सूचना प्रणाली बनाने का निर्देश दिया है।