Middle East War: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा त्रिकोणीय संघर्ष अब केवल मध्य पूर्व की भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक कारकों के कारण यह युद्ध भारत के लिए एक गंभीर कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती बनकर उभरा है। कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा और वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितता ने भारतीय बाजारों में हलचल पैदा कर दी है। इसी पृष्ठभूमि में, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार की विदेश और आर्थिक नीतियों पर कड़े सवाल उठाए हैं। विपक्ष का मानना है कि इस वैश्विक संकट का सीधा असर भारत के आम नागरिक की जेब पर पड़ने वाला है।
शेयर बाजार में हाहाकार और आर्थिक नुकसान: राहुल गांधी का तीखा प्रहार
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी हिंसा से भारतीय अर्थव्यवस्था को “जबरदस्त आर्थिक चोट” पहुंचने वाली है। उन्होंने हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में आई भारी गिरावट का हवाला देते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने विशेष रूप से भारत और अमेरिका के बीच पिछले महीने हुई ट्रेड डील का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में देश के आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने में सरकार विफल साबित हो रही है। उनके अनुसार, निवेशकों का डूबता पैसा और बाजार की अस्थिरता आने वाले एक बड़े आर्थिक संकट का पूर्व संकेत है।
संसद में चर्चा से भागने का आरोप: ‘जनता के मुद्दों पर मौन क्यों?’
न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने इस पूरे मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इन संवेदनशील मुद्दों पर बहस से बच रही है। राहुल गांधी ने सवाल किया, “क्या पश्चिमी एशिया के हालात, ईंधन की बढ़ती कीमतें और डूबती अर्थव्यवस्था जनता से जुड़े जरूरी मुद्दे नहीं हैं?” उन्होंने तर्क दिया कि सरकार चर्चा इसलिए नहीं करना चाहती क्योंकि बहस होने पर कड़वे सच बाहर आएंगे। उन्होंने इसे ‘सोच को बदलने की लड़ाई’ करार देते हुए कहा कि विपक्ष केवल यह चाहता है कि सदन में इन विषयों पर पारदर्शिता के साथ बात हो ताकि देश को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।
संसद परिसर में जोरदार प्रदर्शन: इंडिया ब्लॉक ने बुलंद की आवाज
पश्चिम एशिया के संघर्ष और भारत पर इसके प्रभाव को लेकर विपक्ष ने संसद के भीतर और बाहर आक्रामक रुख अपना लिया है। सोमवार को ‘इंडिया ब्लॉक’ (INDIA Block) के सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व खुद राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने किया। विपक्षी सांसदों का कहना है कि भारत को इस युद्ध में मूकदर्शक बने रहने के बजाय अपने प्रवासियों और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। इस हंगामे और नारेबाजी के कारण सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
ईंधन की कीमतों और प्रवासियों की चिंता: विपक्ष की भविष्य की रणनीति
विपक्ष का मुख्य सरोकार केवल बाजार की गिरावट तक सीमित नहीं है, बल्कि खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली संभावित वृद्धि भी है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि ईंधन के बढ़ते दाम सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ाएंगे, जिसका असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की योजना बना रहा है। उनका तर्क है कि मोदी सरकार की ‘इवेंट मैनेजमेंट’ वाली कूटनीति वास्तविक युद्ध की स्थितियों में देश के हितों की रक्षा करने में अक्षम साबित हो रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के बजट सत्र के बाकी दिनों में भी छाया रहने की उम्मीद है।
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