कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को देश भर में हो रहे पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी सरकार को पेपर लीक करने वाले माफियाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि ये गिरोह बिना किसी डर के अपना काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है।
युवाओं के सपनों की नीलामी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राहुल गांधी ने एक सनसनीखेज ‘रेट कार्ड’ साझा किया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। उन्होंने अपनी पोस्ट में NEET के लिए 40 लाख, IIT-JEE के लिए 15 लाख, उत्तराखंड पटवारी परीक्षा के लिए 15 लाख, बिहार शिक्षक भर्ती के लिए 10 लाख और ओडिशा पुलिस भर्ती के लिए 25 लाख रुपये की रकम उजागर की है। राहुल ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिसके पास पैसा है, वह अपनी पसंद का पेपर ‘मेन्यू’ से चुन लेता है, जबकि कड़ी मेहनत करने वाले छात्रों के सपने बिखर जाते हैं।
राहुल गांधी ने पूछा- माफियाओं को किसका राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?
राहुल गांधी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि अब तक 152 बार पेपर लीक हुए हैं, जिससे लगभग 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि सजा एक को भी नहीं मिली। उन्होंने माफिया की ताकत का कारण बच्चों का भविष्य बेचकर पैसा कमाना और बेखौफ घूमना बताया। प्रधानमंत्री को सीधे चुनौती देते हुए उन्होंने सवाल किया कि आखिर किस शक्तिशाली व्यक्ति के संरक्षण में यह गिरोह इतना निडर होकर काम कर रहा है कि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है।
अनशनकारी सोनम वांगचुक पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
दूसरी ओर, पेपर लीक विवाद के बीच जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और देश भर में परीक्षाओं में हो रही धांधली के खिलाफ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस ने स्पष्ट किया कि वांगचुक की बिगड़ती सेहत और दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के पालन में यह कदम उठाया गया है।
अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति
सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारू बांबा ने वांगचुक के स्वास्थ्य पर अपडेट देते हुए बताया कि फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, लंबे समय तक भूखे रहने के कारण उन्हें डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है। प्रशासन ने कहा है कि मेडिकल सलाह के आधार पर ही उन्हें भर्ती कराया गया है। वांगचुक का यह संघर्ष सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे परीक्षा सुधार की मांग और अधिक तेज हो गई है।










