Raghav Chadha Security: राघव चड्ढा की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है। पंजाब की भगवंत मान सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा वापस लिए जाने के बाद अब गलियारों में चर्चा है कि केंद्र सरकार उन्हें ‘Z’ कैटेगरी का सुरक्षा घेरा प्रदान कर सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पार्टी और चड्ढा के बीच वैचारिक और सांगठनिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
राज्य सरकार ने वापस ली सिक्योरिटी
बताते चले कि, पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने राघव चड्ढा को दी गई सुरक्षा वापस लेने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार अब चड्ढा को दिल्ली और पंजाब में ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा देने पर विचार कर रही है, जबकि देश के अन्य हिस्सों के लिए उन्हें ‘Y+’ श्रेणी का सुरक्षा कवर मिल सकता है। सुरक्षा में यह बदलाव उस समय हुआ है जब हाल ही में उन्हें राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से मुक्त किया गया है।
AAP के भीतर बढ़ता सांगठनिक फेरबदल
आपको बता दे कि, आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता के पद से हटाकर उनकी जगह डॉ. अशोक कुमार मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी है। इतना ही नहीं, सदन में उनके बोलने पर भी कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन मित्तल को यह पद मिला, उसी दिन प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके जालंधर स्थित आवास और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) पर FEMA उल्लंघन के आरोपों में छापेमारी की है।
चड्ढा ने कहा—मुझे हराया नहीं जा सकता
पार्टी द्वारा जिम्मेदारियां छीने जाने के बाद राघव चड्ढा ने भी सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पार्टी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “मुझे खामोश तो किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।” राघव चड्ढा और पार्टी आलाकमान के बीच दरार उस समय से गहरी होनी शुरू हुई थी, जब अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे बड़े नेताओं की जेल यात्रा के दौरान राघव चड्ढा की लंबी चुप्पी पार्टी को खली थी।
पार्टी लीडरशिप की नाराजगी के पीछे के कारण
सूत्रों का दावा है कि जब AAP के शीर्ष नेता कानूनी मुश्किलों में थे, तब राघव चड्ढा अपनी आंखों के इलाज के लिए विदेश में थे। जेल से छूटने के बाद केजरीवाल और सिसोदिया के स्वागत में चड्ढा की दूरी और उत्साह की कमी ने आग में घी डालने का काम किया। इसी ‘अपेक्षाकृत खामोशी’ के कारण पार्टी नेतृत्व उनसे नाराज बताया जा रहा है, जिसका परिणाम सुरक्षा वापसी और पदों से हटाए जाने के रूप में सामने आया है।
Z सुरक्षा घेरे की खासियत
जिस ‘Z’ कैटेगरी सुरक्षा कवर की चर्चा हो रही है, वह एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा कवच है। इसमें सरकार द्वारा कुल 22 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं। इस घेरे में मुख्य रूप से 4 से 6 NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) कमांडो शामिल होते हैं। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस, ITBP या CRPF के जवान और स्थानीय पुलिसकर्मियों की एक बड़ी टीम चौबीसों घंटे सुरक्षा में मुस्तैद रहती है।









