Arvind Kejriwal Reaction : शुक्रवार, 24 अप्रैल को भारतीय राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का औपचारिक ऐलान कर दिया। यह केवल एक व्यक्ति का इस्तीफा नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर एक बड़ी बगावत थी। राघव चड्ढा ने घोषणा की कि उनके साथ ‘आप’ के छह और राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक की सियासत में हड़कंप मचा दिया है। राघव चड्ढा ने पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अब यह वह पुरानी पार्टी नहीं रही, जिसे सिद्धांतों और बदलाव के लिए बनाया गया था।
अरविंद केजरीवाल की तीखी प्रतिक्रिया: “बीजेपी ने पंजाबियों के साथ फिर किया धक्का”
पार्टी में हुई इस बड़ी टूट पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को निशाने पर लिया। केजरीवाल ने लिखा, “बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का।” उनका इशारा स्पष्ट था कि पंजाब से चुनकर आए इन सांसदों को तोड़ना राज्य के जनादेश का अपमान है। ‘आप’ नेतृत्व ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है, जबकि पार्टी के अन्य नेता इसे सत्ता और एजेंसियों के दबाव में किया गया पाला-बदल बता रहे हैं।
भाजपा में शामिल होने वाले दिग्गजों की सूची: कौन-कौन से नाम हैं शामिल?
राघव चड्ढा ने जिन सात सांसदों के भाजपा में विलय का दावा किया है, उनमें पार्टी के कई प्रमुख और प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं। यह सूची न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें खेल और व्यापार जगत की हस्तियां भी हैं:
राघव चड्ढा: पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और राज्यसभा सदस्य।
अशोक मित्तल: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक।
स्वाति मालीवाल: दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष।
हरभजन सिंह: पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पंजाब का बड़ा चेहरा।
संदीप पाठक: पार्टी के संगठन महामंत्री और चाणक्य माने जाने वाले नेता।
विक्रमजीत सिंह साहनी: प्रसिद्ध उद्यमी और समाजसेवी।
राजेंद्र गुप्ता: पंजाब के जाने-माने उद्योगपति।
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“गुनाह में शामिल नहीं होना चाहता था”: राघव चड्ढा का भावुक संबोधन
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने अपने फैसले के पीछे के कारणों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, “मैं काफी समय से प्रयास कर रहा था कि पार्टी के भीतर चीजें बेहतर हों, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।” चड्ढा ने आगे एक बहुत बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह पिछले कुछ समय से पार्टी के कार्यक्रमों से दूर थे क्योंकि वह उनके ‘गुनाह’ में शामिल नहीं होना चाहते थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मैं उनकी दोस्ती के काबिल शायद इसलिए नहीं था क्योंकि मैं उनके गलत कार्यों का हिस्सा बनने को तैयार नहीं था।” उनके इस बयान ने आम आदमी पार्टी के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संवैधानिक विलय की रणनीति: दो-तिहाई बहुमत के साथ बीजेपी में एंट्री
राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने और उनके साथियों ने राजनीति छोड़ने के बजाय ‘पॉजिटिव पॉलिटिक्स’ का रास्ता चुना है। उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि चूंकि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ पाला बदल रहे हैं, इसलिए यह तकनीकी रूप से ‘विलय’ (Merge) माना जाएगा। इस कदम के साथ ही उच्च सदन यानी राज्यसभा में भाजपा की स्थिति और भी मजबूत हो जाएगी, जबकि आम आदमी पार्टी के लिए अपना अस्तित्व बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। राघव चड्ढा ने अंत में कहा कि वे अपने राजनीतिक अनुभव का उपयोग अब राष्ट्र निर्माण और भाजपा की विचारधारा के साथ जुड़कर करेंगे।
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