Raghav Chadha Quits AAP: राघव चड्ढा ने खत्म कर दिया दलबदल कानून? योगेंद्र यादव के बयान ने मचाई खलबली

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने से भारतीय राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। उनके साथ दो-तिहाई सांसदों के टूटने से 'आप' संकट में है। इस घटना पर योगेंद्र यादव ने तीखा प्रहार करते हुए इसे दलबदल कानून की हत्या और लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। पूरी खबर विस्तार से पढ़ें।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 25, 2026

Raghav Chadha Quits AAP: आम आदमी पार्टी (आप) के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने की खबरों ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है। राघव चड्ढा के साथ ‘आप’ के दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने से न केवल अरविंद केजरीवाल को बड़ा झटका लगा है, बल्कि विपक्षी खेमे में खलबली मच गई है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने संसदीय लोकतंत्र की मर्यादा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

दलबदल विरोधी कानून और संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन

बताते चले कि, राघव चड्ढा के बीजेपी में जाने पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्वराज इंडिया के संस्थापक और राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने इसे ‘अलोकतांत्रिक’ करार दिया। योगेंद्र यादव ने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत नाराजगी के कारण पार्टी छोड़ने का मामला नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान की मूल भावना और एंटी-डिफेक्शन लॉ का अपमान किया जा रहा है। उनके अनुसार, जिस तरह से थोक में सांसद पाला बदल रहे हैं, वह दलबदल विरोधी कानून के मूल उद्देश्यों को पूरी तरह नष्ट कर देता है। यादव ने सवाल उठाया कि अगर नेताओं को पार्टी से इतनी ही समस्या थी, तो उन्हें फिर से चुनाव लड़कर जनादेश हासिल करना चाहिए था।

आदमी पार्टी की मौजूदा विचारधारा पर भी निशाना साधा

योगेंद्र यादव ने इस दौरान आम आदमी पार्टी की मौजूदा विचारधारा पर भी निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ‘आप’ के प्रति कोई सहानुभूति नहीं रखते और न ही वे पार्टी के बचाव में खड़े हैं। योगेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि AAP का वैचारिक पतन और पावर पॉलिटिक्स ही इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल की पार्टी अब केवल एक ऐसी जगह बनकर रह गई है जहाँ लोग सिर्फ सत्ता सुख और रसूख के लिए आते हैं। यादव ने खुलासा किया कि उन्होंने लंबे समय से अपने इन पूर्व सहयोगियों से बात नहीं की है, क्योंकि पार्टी अब अपने बुनियादी सिद्धांतों से भटक चुकी है।

एक राष्ट्र, एक चुनाव और एक दलीय शासन का बढ़ता खतरा

राघव चड्ढा पर व्यक्तिगत हमला बोलते हुए यादव ने पूछा कि जिस व्यक्ति को पार्टी ने सब कुछ दिया, वह इस तरह का कदम कैसे उठा सकता है? उन्होंने इस घटना को देश के व्यापक राजनीतिक परिदृश्य से जोड़ते हुए कहा कि यह तानाशाही मॉडल और एक पार्टी-एक नेता की नीति का हिस्सा है। यादव ने चेतावनी दी कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ और ‘एक नेता’ का मॉडल देश पर थोपा जा रहा है, जो विविधतापूर्ण लोकतंत्र के लिए घातक है। राज्यसभा में दो-तिहाई सांसदों का टूटना इस बात का संकेत है कि देश में विपक्ष को योजनाबद्ध तरीके से समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।