Raghav Chadha Controversy: सायोनी घोष की राघव चड्ढा पर टिप्पणी से मचा बवाल, BJP बोली- “यह पंजाबियों का अपमान है”

टीएमसी की फायरब्रैंड नेता सायोनी घोष द्वारा राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर की गई एक टिप्पणी ने नया विवाद पैदा कर दिया है। बीजेपी ने इसे व्यक्तिगत हमला न मानकर पूरे पंजाबी समुदाय का अपमान बताया है। क्या सायोनी का यह बयान पंजाब और बंगाल के सियासी रिश्तों में कड़वाहट घोलेगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 28, 2026

Raghav Chadha Controversy:  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ा है। पहले चरण का मतदान संपन्न हो चुका है और 29 अप्रैल को दूसरे चरण के लिए वोट डाले जाने हैं। इस चुनावी सरगर्मी के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सायोनी घोष का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। इस वीडियो में सायोनी घोष ने आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के नाम को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिसने राजनीतिक गलियारों में तूफान ला दिया है। भाजपा ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए इसे न केवल एक नेता का अपमान, बल्कि पूरे समुदाय की अस्मिता से जोड़ दिया है।

विवाद की जड़: क्या था सायोनी घोष का वह बयान?

पूरा विवाद एक साक्षात्कार के दौरान शुरू हुआ जब एक पत्रकार ने सायोनी घोष की तुलना राघव चड्ढा से की। पत्रकार ने कहा कि सायोनी में वही ‘स्पार्क’ और ‘एनर्जी’ है जो राघव चड्ढा में देखी जाती है। इस तुलना पर प्रतिक्रिया देते हुए सायोनी घोष ने तंज कसा और कहा, “मेरे नाम में चड्ढा नहीं लगा है। चड्ढा ‘चड्डी’ बन सकता है, लेकिन घोष हमेशा घोष ही रहेगा।” उनके इस बयान का वीडियो जैसे ही वायरल हुआ, विपक्षी दलों ने इसे अभद्र और जातिसूचक टिप्पणी करार देते हुए टीएमसी की घेराबंदी शुरू कर दी।

भाजपा का पलटवार: अपमान को पंजाबी अस्मिता से जोड़ा

सायोनी घोष के इस बयान पर भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मालवीय ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि टीएमसी के नेताओं में अन्य समुदायों के प्रति सम्मान की कमी है। उन्होंने कहा कि महुआ मोइत्रा द्वारा गुजरातियों के अपमान के बाद अब सायोनी घोष ने सिख और पंजाबी समुदाय को निशाना बनाया है। भाजपा का तर्क है कि ‘चड्ढा’ उपनाम का मजाक उड़ाना सीधे तौर पर एक विशिष्ट सांस्कृतिक और भाषाई पहचान पर हमला है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भवानीपुर के मतदाताओं पर असर: चुनावी समीकरणों की चर्चा

भाजपा ने इस विवाद को रणनीतिक रूप से भवानीपुर सीट से जोड़ा है, जहाँ से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ती हैं। अमित मालवीय ने रेखांकित किया कि भवानीपुर में गुजराती, सिख और पंजाबी मतदाताओं की एक बड़ी आबादी रहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन समुदायों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का खामियाजा टीएमसी को आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ेगा। भाजपा का मानना है कि ये मतदाता अपने अपमान का बदला वोट की चोट से देंगे, जो टीएमसी की चुनावी राह को मुश्किल बना सकता है।

धार्मिक और सांस्कृतिक उपेक्षा का आरोप

भाजपा ने सायोनी घोष के पुराने विवादों को भी इस मुद्दे के साथ जोड़ दिया है। अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि सायोनी घोष का व्यवहार हमेशा से धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं के प्रति उपेक्षापूर्ण रहा है। उन्होंने घोष द्वारा पहले पोस्ट की गई एक विवादास्पद तस्वीर का जिक्र किया, जिसे हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाला माना गया था। भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि जब किसी की सोच एक विशेष दायरे तक सीमित हो जाती है, तो वे अक्सर इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं।

बढ़ती राजनीतिक कटुता

बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले आया यह विवाद यह दर्शाता है कि राजनीति में व्यक्तिगत हमलों और सामुदायिक पहचान का इस्तेमाल किस हद तक बढ़ गया है। जहाँ एक तरफ सायोनी घोष की टिप्पणी को उनके समर्थक केवल एक शब्द-युद्ध (Wordplay) मान रहे हैं, वहीं भाजपा इसे ‘बंगाली बनाम बाहरी’ और ‘सामुदायिक अपमान’ के बड़े विमर्श में बदलने की कोशिश कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 29 अप्रैल को होने वाले मतदान में जनता इन बयानों को किस तरह लेती है।

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