Pushya Nakshatra 2026: मोती डूंगरी गणेश मंदिर में उमड़ा जनसैलाब, बप्पा को लगा 1001 मोदकों का महाभोग!

जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पुष्य नक्षत्र पर आस्था का सैलाब! 251 किलो दूध और पंचामृत से भगवान गजानन का भव्य अभिषेक किया गया। 1001 मोदकों के महाभोग और गणपति सहस्त्रनाम पाठ के साथ पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 28, 2026

Pushya Nakshatra 2026: गुलाबी नगरी जयपुर में आज आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शुभ माने जाने वाले पुष्य नक्षत्र के अवसर पर मोती डूंगरी गणेश मंदिर में प्रथम पूज्य भगवान गणेश का भव्य अभिषेक और विशेष पूजन आयोजित किया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर परिसर “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा और हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन के लिए कतारों में खड़े नजर आए।

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251 किलो दूध और वैदिक मंत्रोच्चार से अनुष्ठान

Pushya Nakshatra 2026
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में उमड़ा जनसैलाब

पुष्य नक्षत्र के इस विशेष अनुष्ठान की शुरुआत सुबह 8 बजे वैदिक विधि-विधान के साथ हुई। भगवान गजानन को विशेष पंचामृत स्नान कराया गया, जिसकी भव्यता देखते ही बन रही थी। इस पवित्र अभिषेक के लिए 251 किलो दूध, 21 किलो दही, शुद्ध देसी घी, 21 किलो बूरा और शहद का मिश्रण तैयार किया गया। पंचामृत पूजन के पश्चात भगवान को गंगाजल, केवड़ा जल और गुलाब जल से विशेष स्नान कराया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में इस प्रकार का अभिषेक भक्तों के जीवन के समस्त विघ्नों का नाश करता है।

1001 मोदकों का अर्पण और सहस्त्रनाम पाठ

भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए आज के दिन भोग का विशेष महत्व होता है। सुबह 11 बजे विद्वान पंडितों द्वारा ‘गणपति सहस्त्रनाम’ का पाठ किया गया। पाठ के दौरान भगवान के प्रत्येक नाम के साथ उन्हें प्रिय 1001 मोदक अर्पित किए गए। पूजन संपन्न होने के बाद मंदिर आए भक्तों को रक्षा सूत्र (मौली) और हल्दी का तिलक लगाकर विशेष प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुगम दर्शन के कड़े इंतजाम किए हैं।

फूल बंगला और आकर्षक श्रृंगार

भक्ति का यह सिलसिला केवल सुबह तक सीमित नहीं है, बल्कि शाम को मंदिर का नजारा और भी मनमोहक होने वाला है। शाम 4 बजे भगवान गणेशजी को भव्य फूल बंगले में विराजमान किया जाएगा। रंग-बिरंगे सुगंधित फूलों से सजा यह बंगला श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस अवसर पर लंबोदर को नई और अत्यंत आकर्षक पोशाक धारण कराई जाएगी। शाम की आरती के पश्चात भगवान को विशेष रूप से तैयार की गई खीर का भोग लगाया जाएगा, जिसे बाद में भक्तों के बीच बांटा जाएगा।

क्यों खास है पुष्य नक्षत्र पर गणेश पूजा?

हिंदू धर्म में पुष्य नक्षत्र को ‘नक्षत्रों का राजा’ कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से न केवल सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, बल्कि नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी इसे सर्वोत्तम समय माना जाता है। जयपुरवासियों के लिए मोती डूंगरी गणेश जी ‘नगर सेठ’ के रूप में पूजनीय हैं, यही कारण है कि इस विशेष संयोग पर पूरा शहर उनकी शरण में उमड़ पड़ता है।

आस्था और परंपरा का अद्भुत मेल

मोती डूंगरी गणेश मंदिर में आज का दिन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जयपुर की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। भक्ति, सेवा और समर्पण का यह मेल भक्तों को एक आत्मिक शांति और नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।

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