Jagannath Temple: 48 साल बाद खुला रत्न भंडार, गहनों की गिनती और 3D मैपिंग शुरू

पूरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की आधिकारिक गिनती आज दोपहर 12:09 बजे के शुभ मुहूर्त में शुरू हुई। हाई कोर्ट के आदेश के बाद, RBI अधिकारियों और रत्न विशेषज्ञों की मौजूदगी में गहनों का वजन और उनकी शुद्धता जाँची जा रही है। क्या 1978 की सूची से मेल खाएगा आज का खजाना?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 25, 2026

Jagannath Temple: ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के ‘रत्न भंडार’ (Ratna Bhandar) को लेकर सदियों पुराना इंतजार आज खत्म हो गया है। भारी सुरक्षा घेरे और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच, भगवान जगन्नाथ की अकूत संपत्ति के सूचीकरण और गिनती की ऐतिहासिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पूरी कार्यवाही को सरकार द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत अंजाम दिया जा रहा है। रत्न भंडार निरीक्षण समिति के अध्यक्ष जस्टिस बिस्वनाथ रथ ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की मर्यादा और सुरक्षा को देखते हुए केवल अधिकृत विशेषज्ञों को ही भीतर प्रवेश दिया गया है।

परंपरा और नियमों का संगम: 11:18 बजे हुआ प्रवेश

शुक्रवार सुबह ठीक 11:18 बजे का शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया था, जब अधिकारियों और सेवायतों के दल ने मंदिर के सिंहद्वार से प्रवेश किया। परंपराओं का निर्वहन करते हुए, दल ने पहले महाप्रभु की आज्ञा ली और फिर रत्न भंडार के भीतर दाखिल हुए। प्रशासन ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया है कि इस ऐतिहासिक गणना के दौरान भगवान के नित्य अनुष्ठान और दर्शन की व्यवस्था बाधित नहीं होगी। हालांकि, सुरक्षा कारणों से ‘भीतर काठ’ तक सार्वजनिक प्रवेश को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, भक्त ‘बाहरा कथा’ से प्रभु के दर्शन कर सकेंगे।

जस्टिस बिस्वनाथ रथ: “भगवान की संपत्ति का बनेगा लिखित रिकॉर्ड”

समिति के अध्यक्ष जस्टिस बिस्वनाथ रथ ने इस अवसर पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह करोड़ों जगन्नाथ भक्तों की आस्था का विषय है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य भगवान की संपत्ति का एक पारदर्शी और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। उन्होंने ‘चलन्ती भंडार’ (दैनिक उपयोग वाले आभूषणों) से काम शुरू करने की जानकारी दी और भक्तों से प्रार्थना करने का अनुरोध किया ताकि यह जटिल कार्य निर्विघ्न संपन्न हो सके। यह पूरी प्रक्रिया भविष्य के दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

विशेषज्ञों का दल: वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी से होगा दस्तावेजीकरण

रत्न भंडार के भीतर दो विशिष्ट समूह कार्य कर रहे हैं—एक सुपरवाइजरी ग्रुप और दूसरा हैंडलिंग ग्रुप। इस दल में जेमोलॉजिस्ट (रत्न विशेषज्ञ), अनुभवी स्वर्णकार, जौहरी, बैंक अधिकारी, हाई लेवल कमेटी के सदस्य, मंदिर के मुख्य प्रशासक, कलेक्टर और एसपी शामिल हैं। आभूषणों की हर बारीकी को दर्ज करने के लिए हाई-रिज़ॉल्यूशन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जा रही है। जस्टिस रथ के अनुसार, पिछले अनुभव को देखते हुए समय सीमा तय करना कठिन है, क्योंकि 1978 में इस प्रक्रिया में 72 दिन लगे थे, लेकिन इस बार आधुनिक तकनीक का उपयोग हो रहा है।

1978 के रिकॉर्ड से मिलान: वजन और शुद्धता की जांच

इस सूचीकरण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आभूषणों की पहचान और उनके वजन का मिलान करना है। वर्तमान में मिल रहे गहनों की तुलना साल 1978 के उपलब्ध रिकॉर्ड से की जा रही है। दो जेमोलॉजिस्ट विशेष रूप से रत्नों की शुद्धता और प्राचीनता की पहचान करने के लिए नियुक्त किए गए हैं। प्रत्येक आभूषण का वजन करने के बाद उसे डिजिटल रूप से लिपिबद्ध किया जा रहा है, ताकि मंदिर प्रशासन के पास भगवान के रत्नों का सटीक और अद्यतन विवरण मौजूद रहे।

टेबुलेशन और सार्वजनिक जानकारी: सेवायतों में भारी उत्साह

चुनर सेवायत डॉक्टर सरत महांति ने बताया कि सेवायतों के बीच इस कार्य को लेकर अपार आनंद है। उन्होंने जानकारी दी कि गिनती के साथ-साथ ‘टेबुलेशन’ (आंकड़ों का सरणीकरण) भी शुरू हो गया है। पहले उन आभूषणों का आकलन किया जा रहा है जिनका उपयोग महाप्रभु के नित्य श्रृंगार में होता है, इसके बाद प्राचीन और दुर्लभ आभूषणों की बारी आएगी। पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद, प्रशासन उचित माध्यम से जानकारी को सार्वजनिक करेगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

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