गर्मी से तप रहा पंजाब, कल से मिल सकती है राहत; मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

चंडीगढ़  पंजाब में मौसम साफ होते ही गर्मी ने फिर तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार को राज्य का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया।  प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में 2.9 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि यह अभी भी सामान्य से 4.2 डिग्री कम बना हुआ है। सबसे अधिक 40.2 डिग्री सेल्सियस तापमान बठिंडा में रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार से पंजाब के मौसम में फिर बदलाव आएगा। विभाग ने तीन दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और

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Published On :

जून 2, 2026

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चंडीगढ़ 

पंजाब में मौसम साफ होते ही गर्मी ने फिर तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। सोमवार को राज्य का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया।  प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में 2.9 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि यह अभी भी सामान्य से 4.2 डिग्री कम बना हुआ है। सबसे अधिक 40.2 डिग्री सेल्सियस तापमान बठिंडा में रिकॉर्ड किया गया।

मौसम विभाग के अनुसार बुधवार से पंजाब के मौसम में फिर बदलाव आएगा। विभाग ने तीन दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम में बदलाव के कारण अगले कुछ दिनों में तापमान में चार डिग्री तक गिरावट आ सकती है।

मंगलवार को पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, फाजिल्का, मुक्तसर, बठिंडा, रूपनगर और मोहाली समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। छह और सात जून को भी राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश के न्यूनतम तापमान में भी 2.8 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.8 डिग्री सेल्सियस रूपनगर में रिकॉर्ड किया गया।
अमृतसर का अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री, लुधियाना का 35.6 डिग्री, पटियाला का 35.6 डिग्री, पठानकोट का 37.4 डिग्री, फाजिल्का का 37.1 डिग्री और फिरोजपुर का 36.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

धान की फसल के लिए फायदेमंद बारिश
पंजाब कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. गुरनाम सिंह ने कहा कि हाल की बारिश धान की फसल के लिए लाभदायक साबित हो रही है। इससे किसानों की सिंचाई की जरूरत कम हुई है और भूजल संरक्षण में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक वर्षा का पानी घुलित नाइट्रोजन को सीधे फसलों तक पहुंचाता है, जिससे जड़ों का बेहतर विकास होता है। साथ ही बारिश के कारण बिजली की मांग में भी कमी आई है। 

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