Punjab News: पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के अचानक इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। अपने पद को छोड़ने के ठीक बाद राजा वड़िंग ने दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच उनका भावनात्मक पक्ष भी सामने आया, जब उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में जाकर नम आंखों से माथा टेका और अरदास की।
सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने लिखा कि वाहेगुरु की असीम कृपा से उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी गई, उन्होंने उसे अपने तन और मन से पूरा किया है। उनके लिए पंजाब हमेशा उनकी पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है और भविष्य में भी वे पूरी ईमानदारी से अपनी सेवाएं देते रहेंगे।
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राहुल गांधी से मुलाकात और इस्तीफे की असली वजह

गांधी जयंती के अवसर पर दिल्ली में राहुल गांधी से हुई इस अहम मुलाकात के बाद राजा वड़िंग काफी भावुक नजर आए। मीडिया और पार्टी के सामने उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया है और उन्हें इस फैसले का कोई मलाल नहीं है। उन्होंने कहा कि लगातार सक्रिय राजनीति के बाद उन्हें कुछ दिनों के विश्राम यानी छुट्टी की आवश्यकता है। राहुल गांधी द्वारा महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए किए गए पोस्ट को शेयर करते हुए राजा वड़िंग ने बापू के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की बात दोहराई।
करीब साढ़े चार साल का कार्यकाल और नए नेतृत्व की तलाश
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने लगभग साढ़े चार साल तक पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी की कमान संभाली। उनके इस कार्यकाल के समाप्त होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि पंजाब कांग्रेस का अगला सेनापति कौन होगा? पार्टी हाईकमान के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सूबे की कमान किस मजबूत चेहरे को सौंपी जाए ताकि आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया जा सके।
रेस में सबसे आगे चल रहा है विजय इंदर सिंगला का नाम

सूत्रों के अनुसार, नए प्रदेश अध्यक्ष की इस दौड़ में कई दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में बने हुए हैं। हालांकि, संगरूर से पूर्व सांसद और अनुभवी नेता विजय इंदर सिंगला का नाम इस रेस में सबसे ऊपर यानी टॉप पर चल रहा है।
विजय इंदर सिंगला के अलावा इस सूची में कई अन्य मजबूत दावेदारों के नाम भी शामिल हैं:
परगट सिंह: अपनी बेबाक शैली और सांगठनिक पकड़ के लिए जाने जाने वाले नेता।
सुखविंदर रंधावा: पंजाब के अनुभवी और कद्दावर सिख चेहरे।
चरणजीत सिंह चन्नी: राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और दलित चेहरा।
इन तमाम नामों में विजय इंदर सिंगला का पलड़ा भारी बताया जा रहा है। अब सबकी निगाहें कांग्रेस आलाकमान पर टिकी हैं कि पार्टी पंजाब में संगठन को मजबूत करने के लिए किस अनुभवी या युवा चेहरे पर अपना दांव खेलती है।
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