Punjab News: पंजाब में किसानों और मजदूरों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने सरकार के खिलाफ अपने आंदोलन को और तेज करने का बड़ा ऐलान किया है। संगठन के प्रदेश नेता सरवन सिंह पंधेर ने आगामी 24 अगस्त से 31 अगस्त तक के लिए एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा साझा की है, जिसके तहत मंत्रियों के आवासों का घेराव और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
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24 अगस्त से मंत्रियों के घरों के बाहर पांच दिवसीय धरने
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने घोषणा की है कि किसानों और मजदूरों की लंबित मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए 24 अगस्त से मंत्रियों के घरों के बाहर पांच दिवसीय धरने शुरू किए जाएंगे। संगठन का मानना है कि लंबे समय से कृषि क्षेत्र और ग्रामीण मजदूरों की समस्याओं पर प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इन धरनों के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी जाएगी कि वह किसानों के हितों से जुड़े मामलों पर तुरंत ठोस कदम उठाए।
31 अगस्त को डीसी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन
संघर्ष की अगली कड़ी में 31 अगस्त को राज्यभर के डीसी (डिप्टी कमिश्नर) कार्यालयों के बाहर बड़े धरने दिए जाएंगे। इन प्रदर्शनों के जरिए जिला स्तर पर प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपे जाएंगे और किसानों की प्रमुख मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा। पंधेर ने सभी किसानों और मजदूरों से अपील की है कि वे इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें ताकि सरकार पर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए दबाव बनाया जा सके।
डैमों में जलस्तर और चीनी मिलों के बंद होने पर गहरी चिंता
आंदोलन के ऐलान के साथ-साथ सरवन सिंह पंधेर ने पंजाब के मौजूदा हालात से जुड़े कई गंभीर मुद्दे भी उठाए:
संभावित बाढ़ का खतरा: उन्होंने पंजाब में विभिन्न डैमों के अंदर लगातार बढ़ते पानी के स्तर पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में किसी भी आपात स्थिति या बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए सरकार को समय रहते पुख्ता और ठोस इंतजाम करने चाहिए।
चीनी मिलों का बंद होना और चीनी की कीमतें: पंधेर ने राज्य में चीनी की बढ़ती कीमतों और पंजाब की कई बड़ी चीनी मिलों के लंबे समय से बंद पड़े होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की कि बंद पड़ी चीनी मिलों को तुरंत चालू कराया जाए ताकि गन्ने की पिराई समय पर हो सके और किसानों को उनकी फसल का उचित एवं समयबद्ध लाभ मिल सके।
यह देखना अहम होगा कि किसान संगठनों के इस नए ऐलान के बाद सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या समय रहते इन समस्याओं का कोई सकारात्मक समाधान निकलता है या नहीं।
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