Abhijeet Dipke: CJP फाउंडर अभिजीत दिपके पर FIR दर्ज, आरोपों से लेकर पूरे मामले तक जानें सबकुछ

सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके पर शिक्षकों का आरोप है कि स्कूल में दीपके ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और निलंबित कराने की धमकी भी दी गई।

Abhijeet Dipke

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 22, 2026

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Abhijeet Dipke: महाराष्ट्र के लातूर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है। लातूर के एक सरकारी स्कूल में कथित तौर पर बिना अनुमति के प्रवेश कर हंगामा करने और शैक्षणिक कामकाज में बाधा डालने के आरोप में ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके, अजिंक्य शिंदे समेत 4-5 अज्ञात लोगों के खिलाफ औसा पुलिस थाने में आधिकारिक मामला दर्ज किया गया है।

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क्या हैं पूरे मामले के आरोप?

शिक्षकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, यह पूरी घटना 20 अगस्त को दोपहर करीब 1:00 बजे की है।

अनाधिकृत प्रवेश: अभिजीत दिपके, अजिंक्य शिंदे और उनके कुछ साथी बिना किसी पूर्व अनुमति के स्कूल परिसर के अंदर दाखिल हुए।

कक्षाओं में दखल: आरोप है कि ये लोग सीधे कक्षाओं के अंदर गए, वहां बैठे विद्यार्थियों से अलग-अलग सवाल-जवाब किए और करीब डेढ़ से दो घंटे तक स्कूल परिसर में घूमते रहे। इस दौरान स्कूल के अंदर तस्वीरें भी खींची गईं।

शिक्षकों के साथ विवाद: स्कूल में दूसरे शिक्षण संस्थानों या अन्य विद्यार्थियों को बैठाए जाने के एक विशेष मुद्दे को लेकर इन लोगों का शिक्षकों के साथ तीखा विवाद हुआ।

धमकी और अभद्र भाषा: शिक्षकों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया और उन्हें नौकरी से निलंबित कराने तक की धमकियां दी गईं।

शिक्षकों का कहना है कि इस अचानक हुए घटनाक्रम और हंगामे के कारण स्कूल के सामान्य शैक्षणिक कामकाज और पढ़ाई-लिखाई के माहौल में काफी बाधा पहुंची।

पुलिस जांच और आगामी कार्रवाई

शिक्षकों की लिखित शिकायत के आधार पर औसा पुलिस थाने में अभिजीत दिपके और उनके साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए तमाम बिंदुओं और आरोपों की गहराई से जांच-पड़ताल कर रही है। हालांकि, इस मामले में अभिजीत दिपके या उनके सहयोगियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या अपना पक्ष सामने नहीं रखा गया है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के तथ्यों और बयानों की समीक्षा करने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम की असल सच्चाई पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगी।

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