Shashi Tharoor: वंदे मातरम् को लेकर शशि थरूर का रुख साफ, कांग्रेस के फैसले पर दिया बड़ा बयान

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने तिरुवनंतपुरम में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान को लेकर पार्टी का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार आगे भी कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी।

Shashi Tharoor

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 22, 2026

Shashi Tharoor: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने तिरुवनंतपुरम में एक बयान जारी करते हुए ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान को लेकर पार्टी के रुख और उसकी पुरानी परंपरा पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में लंबे समय से चली आ रही परंपरा का पालन करती आ रही है और आगे भी इसी व्यवस्था को जारी रखा जाएगा।

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कांग्रेस की पारंपरिक व्यवस्था और दिशा-निर्देश

शशि थरूर के अनुसार, कांग्रेस पार्टी अपने आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत में अपनी स्थापित परंपरा के तहत राष्ट्रगान का एक अंतरा और ‘वंदे मातरम’ के दो पद गाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर यही व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है और भविष्य के कार्यक्रमों में भी इसी नियम का पालन किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई राष्ट्रीय या आधिकारिक सरकारी कार्यक्रम होता है, तो उसमें सभी लोग पूरे सम्मान के साथ खड़े होते हैं और कार्यक्रम के स्वरूप के अनुसार ही गीत या गान का चयन किया जाता है।

1937 का ऐतिहासिक निर्णय और पृष्ठभूमि

‘वंदे मातरम’ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित एक ऐतिहासिक गीत है, जिसका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

गीत के पद और आपत्तियां: इस गीत के शुरुआती दो पदों में मातृभूमि की प्रशंसा की गई है, जबकि इसके बाद के कुछ पदों में पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख आता है। इसी धार्मिक संदर्भ को लेकर उस दौर में कुछ मुस्लिम नेताओं और मुस्लिम लीग की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई थी।

पार्टी का ऐतिहासिक फैसला: इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, वर्ष 1937 में कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अन्य प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं की सहमति से यह निर्णय लिया था कि सार्वजनिक व राष्ट्रीय कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। कांग्रेस पार्टी का यह तर्क है कि वे आज भी उसी ऐतिहासिक निर्णय और परंपरा का पूरी निष्ठा के साथ पालन कर रहे हैं। शशि थरूर के इस स्पष्टीकरण से पार्टी के भीतर और बाहर इस विषय को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाने का प्रयास किया गया है।

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