Punjab News: पंजाब में परिवहन सेवाओं से जुड़े ठेका कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ‘पबनस/पी.आर.टी.सी. ठेका कर्मचारी यूनियन’ से जुड़े कर्मचारियों ने रविवार रात 12 बजे से अनिश्चितकालीन और राज्यव्यापी हड़ताल का आगाज कर दिया है। इसके चलते आगामी 3, 4 और 5 अगस्त को पंजाबभर में सरकारी बसों का पूरी तरह से चक्का जाम रहेगा। इस दौरान यूनियन द्वारा राज्य के विभिन्न डिपुओं और बस अड्डों पर बड़े स्तर पर रोष प्रदर्शन किए जाएंगे, जिससे आम जनता और विशेषकर सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
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सरकार के साथ बैठक और यूनियन की चेतावनी
यूनियन के प्रदेश महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को सरकार और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ यूनियन की एक अहम बैठक निर्धारित है। इस बैठक में यूनियन अपने सभी लंबित मुद्दों और मांगों को पूरी प्रमुखता से उठाएगी।
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि इस बैठक में उनकी मांगों का कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया, तो वे सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। नेताओं का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।
पक्के कर्मचारियों की कमी और बसों का संचालन प्रभावित
इस तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी की बस सेवाओं पर भारी असर पड़ा है। स्थिति यह है कि हड़ताल के दौरान केवल नियमित (पक्के) कर्मचारी ही बसें चलाएंगे, लेकिन वर्तमान में प्रत्येक डिपो में गिने-चुने पक्के कर्मचारी ही कार्यरत हैं।
यही वजह है कि पूरे पंजाब में बमुश्किल 100 बसों का परिचालन होना भी बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। हड़ताल के पहले दिन ही शाम के समय पंजाब से बाहर अन्य राज्यों को जाने वाली लंबी दूरी की बसों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया। बस अड्डों पर पहुंचे यात्रियों को बसें न मिलने के कारण भारी निराशा हुई और उन्हें मायूस होकर अपने घरों को वापस लौटना पड़ा।
ठेका कर्मचारियों की प्रमुख मांगें और विरोध के कारण
डिपो-2 के प्रधान सतपाल सिंह सत्ता और डिपो-1 के नेता चानण सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। यूनियन की मुख्य मांगें और विरोध के बिंदु निम्नलिखित हैं:
कर्मचारियों का नियमितीकरण: वर्षों से सेवाएं दे रहे ठेका कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से पक्का किया जाए।
आउटसोर्सिंग प्रणाली में बदलाव: आउटसोर्सिंग के तहत बीच से ठेकेदार को पूरी तरह बाहर निकालकर विभाग द्वारा कर्मचारियों से सीधे तौर पर सेवाएं ली जाएं। यूनियन का तर्क है कि ठेकेदार को मोटी राशि अदा की जा रही है और भारी टैक्स चुकाया जा रहा है, जबकि सीधे भर्ती से विभाग करोड़ों रुपये बचा सकता है।
निजीकरण का विरोध: परिवहन विभाग में किलोमीटर स्कीम के तहत बसें शामिल करने का कड़ा विरोध किया जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट रूप से निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यूनियन नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी इन जायज मांगों को मानकर ठोस नीति नहीं बनाती, तब तक उनका संघर्ष और विरोध प्रदर्शन इसी प्रकार जारी रहेगा।
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