Punjab News: DA पर कानूनी लड़ाई तेज, कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा महंगाई भत्ते (DA) के मामले में कर्मचारियों और पेंशनरों के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद, कर्मचारियों ने किसी भी एकतरफा आदेश या राहत को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में 'कैविएट' दायर कर दी है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 6, 2026

Punjab News: पंजाब एवं महंगाई भत्ते (DA) को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा कर्मचारियों और पेंशनरों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाए जाने के बाद अब कानूनी मोर्चे पर हलचल तेज हो गई है। पंजाब सरकार की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं, क्योंकि राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए पहले ही ‘कैविएट’ (Caveat) दायर कर दी है। यह कानूनी कदम कर्मचारियों द्वारा 5 अगस्त को उठाया गया है, ताकि सरकार के किसी भी संभावित कानूनी दांव से पहले अपनी स्थिति पूरी तरह मजबूत की जा सके।

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कर्मचारियों ने क्यों उठाया यह एहतियाती कदम?

राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के मन में यह गहरी आशंका बनी हुई है कि पंजाब सरकार हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) यानी विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों ने एहतियात के तौर पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर कर दी है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, कैविएट एक ऐसा एहतियाती कानूनी उपाय होता है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी पक्ष को यह डर हो कि दूसरा पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटाकर उसके खिलाफ कोई एकतरफा आदेश पारित करवा सकता है। इस कानूनी उपाय का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि अदालत बिना दूसरा पक्ष सुने कोई भी अंतरिम आदेश या स्टे (स्थगन) न दे।

सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा कैविएट का असर?

यदि अब पंजाब सरकार डी.ए. मामले में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करती है, तो सुप्रीम कोर्ट कर्मचारियों और पेंशनरों का पक्ष सुने बिना सरकार को कोई भी अंतरिम राहत या स्टे नहीं दे सकेगा।

न्यायालय का यह नियम है कि कैविएट दाखिल होने की स्थिति में सबसे पहले दूसरे पक्ष को नोटिस जारी किया जाता है और उनकी दलीलें व पक्ष सुने जाते हैं। इसके बाद ही अदालत कोई अंतरिम आदेश पारित कर सकती है। इस प्रकार कर्मचारियों ने कानूनी रूप से सरकार के रास्ते में एक मजबूत दीवार खड़ी कर दी है, जिससे उन्हें बिना सुने अदालत कोई एकतरफा फैसला न सुना सके।

हाईकोर्ट का सख्त निर्देश

उल्लेखनीय है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने एक बेहद सख्त फैसले में पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि वह राज्य के करीब 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों का रुका हुआ डीए (महंगाई भत्ता) आगामी 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से जारी करे।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि यदि इस महीने के अंत तक कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका डीए नहीं मिला, तो सरकार को मूल राशि के साथ-साथ 6 प्रतिशत की दर से ब्याज भी चुकाना होगा। हाईकोर्ट के इस कड़े फैसले से सरकार पर भारी वित्तीय दबाव आ गया है, और अब सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल होने से कर्मचारियों ने अपनी जीत को सुरक्षित करने के लिए कानूनी घेराबंदी और मजबूत कर ली है।

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