Punjab News: चंडीगढ़ प्रशासन के एस्टेट विभाग ने शहर में किराए की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के लिए ‘यू.टी. चंडीगढ़ किराएदारी नियम, 2026’ को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। प्रशासक द्वारा मंजूर किए गए ये नए नियम अब पूरे चंडीगढ़ क्षेत्र में प्रभावी हो चुके हैं। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मकान मालिकों और किराएदारों के बीच उत्पन्न होने वाले किराए के बकाये, कब्जे, सुरक्षा और अन्य आपसी विवादों का तेजी से और निष्पक्ष समाधान निकालना है। इसके लिए प्रशासन ने एक मजबूत तीन-स्तरीय ढांचा तैयार किया है, जिसमें रेंट अथॉरिटी, रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल शामिल हैं।
2 महीने के भीतर देनी होगी किराएदारी की जानकारी

न नए नियमों के अनुसार, जैसे ही मकान मालिक और किराएदार के बीच कोई नया अनुबंध तय होता है, उसके ठीक 2 महीने के भीतर दोनों पक्षों को संयुक्त या व्यक्तिगत रूप से ऑनलाइन माध्यम से रेंट अथॉरिटी के पास इसकी पूरी जानकारी दर्ज करानी होगी। जानकारी प्राप्त होने के बाद, रेंट अथॉरिटी महज 7 दिनों के भीतर एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) जारी करेगी, जो संबंधित पक्षों को डिजिटल ई-रसीद के रूप में प्राप्त होगा। किराएदारी से जुड़े सभी दस्तावेज एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जाएंगे, जिसमें ओटीपी (OTP) आधारित वेरिफिकेशन की पुख्ता सुविधा होगी। आम जनता की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए इस रिकॉर्ड तक पहुंच केवल संबंधित पक्षों और अधिकृत प्रशासनिक अधिकारियों तक ही सीमित रखी जाएगी।
बिजली-पानी के खर्च और भुगतान के नए प्रावधान

यदि मकान मालिक और किराएदार के बीच केवल मासिक किराए को लेकर ही नहीं, बल्कि बिजली, पानी, मेंटेनेंस या अन्य सुरक्षा सेवाओं के बिलों को लेकर कोई मतभेद होता है, तो कोई भी पक्ष सीधे रेंट अथॉरिटी के समक्ष आवेदन कर सकता है। ऐसे मामलों में फैसला देते समय उस विशिष्ट इलाके के मौजूदा बाजार भाव और किराए की दरों को मुख्य आधार बनाया जाएगा।
यदि कोई मकान मालिक जानबूझकर किराया लेने से मना करता है या विधिवत रसीद देने से कतराता है, तो किराएदार लगातार 2 महीने तक एनईएफटी (NEFT), आरटीजीएस (RTGS), चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से भुगतान कर सकता है। इसके बावजूद यदि भुगतान स्वीकार नहीं किया जाता है, तो किराएदार उस राशि को सीधे रेंट अथॉरिटी के पास जमा करा सकेगा।
सुनवाई और फैसले के लिए सख्त समयसीमा
विवादों के त्वरित निपटारे के लिए नए नियमों में कड़े समयबद्ध निर्देश तय किए गए हैं:
रेंट अथॉरिटी में मामला दर्ज होने के बाद विरोधी पार्टी को अनिवार्य रूप से 15 दिन के भीतर अपना जवाब देना होगा। हालांकि, कोई ठोस और उचित कारण होने पर इस समयसीमा को अधिकतम 30 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।
रेंट कोर्ट के आदेशों की पालना नोटिस मिलने के 30 दिन के अंदर सुनिश्चित करनी होगी, और किसी भी मामले में केवल एक बार ही स्थगन (Adjournment) की अनुमति मिलेगी।
उच्च स्तर पर रेंट ट्रिब्यूनल को भी नोटिस तामील होने के 60 दिन के भीतर अपील का निपटारा करना होगा।
डीसी-कम-एस्टेट ऑफिसर निशांत कुमार यादव के अनुसार, इन नए नियमों के आने से चंडीगढ़ में किराएदारी का पूरा सिस्टम पारदर्शी बनेगा और अनावश्यक मुकदमों से राहत मिलेगी।
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